पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने असद अहमद और शूटर गुलाम मोहम्मद के एनकाउंटर के मामले में 12 बिंदुओं पर सवाल उठाया है। पहला सवाल है एफआईआर में दावा किया गया है कि जब मुठभेड़ समाप्त हुई, उस समय तक असद और गुलाम मोहम्मद जिंदा थे. इसके विपरीत एसटीएफ द्वारा प्रसारित किए गए फोटोग्राफ में असद और गुलाम मोहम्मद किसी भी प्रकार से जिंदा नहीं लग रहे हैं. फोटो से साफ लगता है कि मौके पर असद और गुलाम मोहम्मद की मृत्यु हो चुकी थी और वह फोटोग्राफ मृत व्यक्तियों के थे, ना कि दर्द से कराह रहे व्यक्तियों के, जैसा एफआईआर में दावा किया गया है. इससे एफआईआर में मुठभेड़ खत्म होने के बाद असद और गुलाम मोहम्मद के जीवित होने और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भेजे जाने का दावा झूठा दिखता है। इसी प्रकार असद से जुड़े एक फोटो में उसे जिस पोजीशन में दिखाया गया है, उसमें वह मोटर साइकिल के हैंडल के नीचे पड़ा है. यह किसी भी स्थिति में संभव नहीं है कि कोई आदमी गिरने के बाद पहले से गिरे पड़े मोटर साइकिल के हैंडल के नीचे आ जाए. इसके विपरीत यदि वह मोटरसाइकिल पर गिरेगा तो उसका शरीर मोटरसाइकिल के ऊपर होगा, न कि मोटर साइकिल के हैंडल के नीचे. अतः मोटर साइकिल के हैंडल के नीचे जिस प्रकार से असद का शरीर दिखाया गया है, वह स्पष्टतया संदेह पैदा करता है. द के हाथ में जिस प्रकार से बंद मुट्ठी में पिस्टल दिखाया गया है, वह प्रथमदृष्ट्या मेडिको लीगल सिद्धांत से सही नहीं जान पड़ता है क्योंकि मेडिको लीगल सिद्धांत के अनुसार घायल होते ही उसके हाथ से पिस्तौल नीचे गिर गया होता। असद के इस फोटोग्राफ में उसके ठीक बगल में एक खाली पिस्टल दिख रहा है और एक छाया दिख रही है, जो स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किसकी छाया है. यह छाया भी घटना के असली होने पर सवाल खड़े कर रही है।ऐसे 12 सवाल पूर्व आईपीएस के है।

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