May 7, 2026

धूमधाम से हजरत अली जयंती-वाराणसी

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वाराणसी में धूमधाम से हजरत अली जयंती पर करायी गई फातेहा, जायरीन मांगे अमन की दुआये

वाराणसी में चौथे खालीफा हज़रत अली जयंती पर जायरीन ने आस्तानो पर जहा फातेहा करायी वही अमन की दुआए भी मांग रहे हैैैै। जुमेरात को वलियो के आस्ताने व बुुुज़ुरगो के दर पर जायरीन का हुजुम सुबह से ही जनसैलाब के रुप में दिखाई दिया। आलम यह था कि जैसे हर तरफ मेला लगा हो। एक तो जुमेरात उस पर से हज़रत अली की जयंती, यह दिन किसी ईद से कम नदी है। तमाम जायरीन अकीदत के साथ औलिय-ए-कराम के दर पर फातेहा और मन्नते मांगते दिखाई दिये। आस्तानों पर मुल्क में अमनो-मिल्लत और देश की तरक्की के लिए कई जगहों पर इश्तेमाई दुआख्वानी का एहतमाम किया गया। हजरत सैयद मुख्तार अली शाह शहीद रहमतुल्लाह अलैह उर्फ लाटशाही बाबा के दर सर्किट हाउस पर जायरीन का मजमा जुटा। किसी ने मन्नत मांगी तो किसी ने फातेहा पढ़कर चादर चढ़ायी और दुआ के लिए अपनी झोली फैलायी। दरगाहे फातमान मेें शिया वर्ग की ओर से हज़रत अली जयंती पर फातेहा करायी गई और खुसुुुुसी दुुुआए हुुुई।

आस्ताने के आसपास जायरीन का लगा मेला

इस मौके पर सदर बाज़ार में हज़रत बाबा बहादुुुर शहीद के आस्ताने के आसपास जायरीन का जैसे मेला लगा हो। तमाम जायरीन अकीदत के साथ बाबा के दर पर फातेहा पढ़ते दिखे। यहां जायरीन ने मन्नती चादर चढ़ायी और तबरुक की फातेहा करायी जो तमाम लोगों में तकसीम किया गया। मंडुवाडीह स्थित हजरत शाह तैयब बनारसी रहमतुल्लाह अहैल, राजघाट स्थित हजरत चंदन शहीद, नगवां स्थित हज़रत याकूब शहीद, अस्सी स्थित हज़रत बुलाकी शहीद बाबा रहमतुल्लाह के दर पर भी लोगों का हुजूम मन्नते व मुराद के साथ ही हाज़िरी लगाने जुटा हुआ था। जहां ज़ियारत करके न सिर्फ अक़ीदतमंदों ने फैज़ उठाया बल्कि चादर चढ़ाई और दुआएं भी मांगी। ऐसे ही हज़रत भोले शाह दीवान, हज़रत मलंग शहीद, हज़रत पुलंग शहीद, हज़रत मुश्किल आसान शाह, हज़रत बिजली शहीद, हज़रत बैंक शाह, हज़रत नूरुद्दीन शहीद, हजरत ज़ाहिद शहीद, हज़रत बहादर शहीद, हज़रत रहीम शाह बाबा, हज़रत नुरैन शहीद, हज़रत मकदूम ताजुद्दीन शाह बाबा, हज़रत मखदूम शहीद बजरडीहा, हज़रत फखरुद्दीन शहीद, हज़रत सैय्यद सालार मसूद गाज़ी मियां, हज़रत अलवी शहीद, हज़रत खाकी शाह, हज़रत बाबा फरीद, हज़रत तिनका शाह आदि के दर पर भी ज़ायरीन मन्नत व मुराद मांगते दिखाई दिये। इसमें हिन्दू-मुस्लिम दोनों वर्ग के लोग फैज़ उठाते दिखाई दे रहे थे।