कांग्रेस में मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी को इस सीट से उतारने की तैयारी चल रही है
वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से कांग्रेसी नेता मकसूद खां पर देश के प्रधानमंत्री व वाराणसी सांसद नरेंद्र दामोदर दार भाई मोदी के खिलाफ किसी ब्राह्मण के अलावा चर्चित मुस्लिम चेहरे की भी तलाश कर रहा है। ताकि गठबंधन मतों में मुस्लिम चेहरे के नाम पर बीजेपी के सवर्ण मतों में सेंधमारी कर इस सीट पर जीत पक्की किया जाय। इसके लिए कांग्रेस में मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी को इस सीट से उतारने की तैयारी चल रही है। जिसके लिए मकसूद खां का नाम सबसे आगे चल रहा है।
कांग्रेस के लिए वाराणसी संसदीय सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। क्योंकि 2004 के संसदीय चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ राजेश मिश्र ने जीत हासिल कर पार्टी का परचम लहराया था। मगर लोकसभा चुनाव 2009 व 2014 में कांग्रेस से भाजपा ने छीन लिया। चुनाव में सपा कांग्रेस से नीचे चौथे स्थान पर पहुंच गयी। इसी लिए इस बार कांग्रेस इस सीट पर दुबारा जीत के लिए चुनावी समीकरण के साथ -साथ जातीय समीकरण पर खासा ध्यान दे रही है। संसदीय सीट पर जातीय समीकरण को देखे तो ब्राह्मण मतों के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम है। राजनैतिक दलों के मुताबिक वाराणसी लोकसभा सीट कुल वोटर 1609460 पुरुष 902969 महिला 706410 अन्य 81 वोटिंग का दिन 19 मई कौन-कौन सी विधानसभा सीटें आती हैं इस संसदीय सीट के तहत: रोहनिया वाराणसी उत्तर वाराणसी दक्षिण वाराणसी कैंट सेवापुरी जातिगत समीकरण वाराणसी लोकसभा सीट पर जातिगत समीकरण मिश्रित हैं। इस सीट पर मुसलमान, यादव और दलित वोटों का कुल योग 50 फीसदी से ज्यादा है। किसी भी विधानसभा में 50 हजार से ज्यादा ब्राह्मण मतदाता नहीं है। और मुस्लिम आकड़ा देखा जाये तो 1. 30 हजार दक्षिणी, 1 लाख उत्तरी, 90 हजार कैंट, 30 से 35 हजार रोहनिया, 20 से 25 हजार सेवापुरी विधानसभा में
ब्राह्मण मतदाता कांग्रेस से दूर होने के बाद परंपरागत रूप से भाजपा के वोटर रहे है। हालांकि समय-समय पर हुए चुनावों में इन मतों में कुछ मतों का ध्रुवीकरण सपा और कांग्रेस के बीच भी होता रहा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की निगाह इस बार इसी वोट बैंक पर है। अगर कांग्रेस ने किसी मुस्लिम समाज से प्रत्याशी नही बनाया तो सपा किसी मुस्लिम चेहरों को प्रत्याशी बना कर एक तीर से कई निशाने साधना चाहतीं है। पहली बात तो यह कि ब्राह्मण, राजपूत, बनिया मतदाताओ में भाजपा की मजबूत पकड़ देख पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव करने को मजबूर है।
दरअसल, पार्टी गठबंधन मत यादव,मुस्लिम और दलित में ब्राह्मण मतों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। इससे जहां भाजपा और अपना दल(एस) गठबंधन को नुकसान होगा वही कांग्रेस को बढ़त बनाने का मौका भी मिल जायेगा। जिले से सपा के कई ब्राह्मण नेताओ ने इसी संभावनाओं को देखते हुए टिकट के लिए आवेदन किया है। जिनमे डाॅ राजेश मिश्र, अजय राज के अलावा सबसे बड़ा नाम मकसूद खां का आ रहा है। संभावना व्यक्त की जा रही है अगर गुटबाजी हुई तो बाहर से भी किसी प्रत्याशी को लड़ाया जा सकता है।

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