May 6, 2026

हिरासत, लापता या फिर मौत: चीन में कोरोना पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को मिल रही ये खौफनाक सजा-

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हिरासत, लापता या फिर मौत: चीन में कोरोना पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को मिल रही ये खौफनाक सजा

 

बीजिंग. कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) की शुरुआती जानकारी दुनिया के सामने ठीक तरीके से न रखने को लेकर चीन (China) हमेशा आलोचना शिकार होता रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्पेशल टीम को भी चीन ने सही तरीके से जांच नहीं करने दी थी. दरअसल ड्रैगन लगातार अपने यहां कोरोना से संबंधित जानकारी बाहरी दुनिया में जाने से रोकता रहा है. कई पत्रकार (Journalist) और एक्टिविस्ट (Activist) कोरोना पर रिपोर्टिंग की भारी कीमत चुका चुके हैं. एक्सपर्ट्स ने कहा है कि चीन ने स्वतंत्र पत्रकारिता के खिलाफ जंग छेड़ रखी है. वो लगातार उन लोगों को प्रताड़ित कर रहा है जो कोरोना को लेकर सच्चाई उजागर कर रहे हैं.

 

 

रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में रहने वाले चीन के नागरिक चेन कुन को जानकारी मिली चीन की पुलिस पूछताछ के लिए उन्हें वापस अपने देश लेकर जा रही है. चेन कुन को तुरंत समझ आ गया कि उनके भाई की एक वेबसाइट की वजह से यह सबकुछ हो रहा है. दरअसल चेन के भाई चीन में टर्मिनस 2049 नाम की एक वेबसाइट चलाते हैं जिसमें मीटू मूवमेंट और अप्रवासी अधिकार समेत कोरोना पर रिपोर्टिंग का बड़ा डेटा मौजूद है. चीनी सरकार की इस वेबसाइट पर सख्त निगाह है. बीते कुछ महीने से ये वेबसाइट कोरोना को लेकर चीनी सरकार की पोल खोल रही है. अब चीनी प्रशासन लगातार वेबसाइट संचालकों के परिवारवालों को परेशान कर रहा है.

 

 

महिला पत्रकार को पहुंचाया सलाखों के पीछे

महिला पत्रकार झांग झान को भी कोरोना पर रिपोर्टिंग के लिए 4 साल की कैद सुनाई गई है. उनका अपराध है- लड़ाई-झगड़ा और मुश्किलें पैदा करना. झांग ने वुहान के ढेरों अस्पतालों में जाकर रिपोर्टिंग की, जब कोरोना अपने पीक पर था. साथ ही उन्होंने पत्रकारों के अरेस्ट के खिलाफ भी रिपोर्टिंग की, जो कोरोना के चलते स्थानीय प्रशासन की कैद में थे. 37 साल की झांग पेशे से एक वकील और शंघाई की रहने वाली हैं. वे फरवरी 2020 में वुहान पहुंची, जब वहां कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा था कि चीन के इस हिस्से में लगाता श्मशान घाट चालू हैं. हालांकि खुद चीन ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया.