*LEGAL Update*
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*सरकारी गल्ले की दुकान के आरक्षण का शासनादेश संवैधानिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट*
🔵सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन में विकासखंड ब्लॉक खंड स्तर पर आरक्षण लागू करने संबंधी शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि शासनादेश में स्पष्ट है कि विकास खंड को इकाई मानकर तहसील स्तरीय समिति आरक्षण की गणना करेगी। दुकान खाली होने पर ही आरक्षण लागू होगा। दुकानदार का लाइसेंस रद्द नही किया जायेगा
*उक्त आदेश जस्टिस एसपी केशरवानी एंव जस्टिस आरएन तिलहरी की खंडपीठ ने कुशीनगर के रहने वाले अखिलेश तिवारी की याचिका पर दिया।*
🟢 *याचिका में पांच अगस्त 11 के शासनादेश के उपखंड (1) और (2) को आर्टिकल 14 और 15 के* विपरीत करार देते हुए इसकी संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि गुलरिया गांव में मद्दे गल्ले की दुकान आरक्षित थी। बीते 26 जुलाई 2019 को लाइसेंस निरस्त होने से दुकान खाली हुई।
*इसलिए यह सामान्य वर्ग को मिलनी चाहिए,लेकिन शासनादेश के अंतर्गत यह दुकान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित है।*
🔴29 जुलाई 2019 को जारी उपजिलाधिकारी के पत्र के मुताबिक 92 दुकानों में से 25 एससी/एसटी और 50 ओबीसी की है। कुल 75 दुकाने आरक्षित श्रेणी की है जो कोटे से काफी अधिक है। इसलिए गुलरिया में दुकान सामान्य वर्ग को दी जानी चाहिए। 13 नवंबर 2019 को एससी वर्ग को दुकान का आवंटन रद्द किया जाए।
👉कोर्ट ने कहा कि जिस वर्ग के लिए दुकान आरक्षित होगी रिक्त होने पर उसे आवंटित की जाएगी।

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