October 11, 2026

वि‍श्‍वनाथ मंदि‍र परि‍क्षेत्र में स्‍थि‍त काशी का प्राचीन अक्षयवट गि‍रा, महंत ने जतायी अनि‍ष्‍ट की आशंका- अजय मिश्रा

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वाराणसी: वि‍श्‍वनाथ मंदि‍र परि‍क्षेत्र में स्‍थि‍त काशी का प्राचीन अक्षयवट गि‍रा, महंत ने जतायी अनि‍ष्‍ट की आशंका… पूरे भारत मे मात्र 3 ही अक्षयवट हैं।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित पौराणिक महत्व के वृक्ष अक्षय वट बुधवार को अचानक गि‍र गया। स्‍थानीय लोगों का आरोप है कि‍ विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण कर रही पीएसपी कंपनी और मंदिर प्रशासन की लापरवाही से यह प्राचीन पेड़ गिर गया है। इसकी सूचना मिलते ही मंदिर परिसर में पुजारियों और महंतों की भीड़ लग गयी। सभी ने इसे किसी अनिष्ट के संकेत बताया और इस कृत्य पर अपना रोष जताया।

 

पौराणिक काल से भारत में गया, प्रयागराज और काशी में वटवृक्ष है। गया में वटवृक्ष के निचे पिंडदान, प्रयागराज में वटवृक्ष के निचे सर मुंडाने और काशी में वटवृक्ष के निचे दंडी स्वामी को भोजन कराने का अपना मत्व है। स्‍थानीय लोगों के अनुसार मंदिर प्रशासन की लापरवाही से इस वृक्ष को गिरने से बचाया नहीं जा सका।

 

दरअसल, प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रॉजेक्ट विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान दायरे में अक्षयवट हनुमान और शिव सभा मन्दिर भी आये हैं। महंत परिवार से अनुमति लेकर विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने लिखित आश्वासन के साथ इन मंदिरों में सुंदरीकरण का कार्य शुरू कि‍या था।

 

मंदि‍र के महंत बच्चा पाठक ने बताया कि शुरू में ही महंत परिवार ने अधिकारियों को अवगत कराया था कि वृक्ष और अंजनी पुत्र के विशाल विग्रह को संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए ही कार्य किया जाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि इन्‍हें सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा। पर निर्माण कर रही पीएसपी कम्पनी और मंदिर प्रशासन की लापरवाही से वृक्ष संरक्षित नहीं किया गया और बुधवार की सुबह विशाल अक्षयवट वृक्ष ढह गया। इससे मंदिर महंत परिवार में रोष व्याप्त है। महंत परिवार के अनुसार ये किसी अनिष्ट के संकेत हैं।

महंत परिवार ने उक्त प्रकरण के संदर्भ में सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर मामले में अपना विरोध जताने की बात कही है। उक्त संदर्भ में धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी को फोन करके शिकायत करने का महंत परिवार ने प्रयास किया मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका।

 

यह है मान्यता

अक्षयवट वृक्ष पूरे भारत वर्ष में तीन जगह पर विराजमान है। काशी, गया और प्रयाग। महंत बच्चा पाठक, नील कुमार मिश्रा और रमेश गिरी ने संयुक्त रूप से बताया कि गया में वृक्ष के नीचे पिंडदान करने का, प्रयागराज में सिर मुंडन कराने और काशी में इसी वृक्ष के नीचे डंडी स्वामी को भोजन कराने का महात्म्य है। तीनो स्थानों पर हनुमान जी तीन स्वरूप में विराजमान है। गया में बैठे है, प्रयागराज में लेटे है किले के अंदर और काशी में खड़े हनुमान जी है।