रूस-यूक्रेन तनाव से वाराणसी के 200 करोड़ का आर्डर रुका, कारपेट व बनारसी साड़ी उद्योग से लेकर आयात-निर्यात प्रभावित
वाराणसी : रूस-यूक्रेन के मध्य बढ़ते तनाव का असर पूर्वांचल के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। इसे देखते हुए लघु उद्योग भारती संगठन से जुड़े उद्यमियों ने कबीरचौरा स्थित कार्यालय पर बैठक की। इसमें आयात-निर्यात से जुड़े उद्यमियों ने रूस-यूक्रेन के बीच संभावित युद्ध को लेकर चिंता व्यक्त की। कहा कि यही स्थिति रही तो कोरोना काल से उबर रहे उद्योगों को फिर से नुकसान उठाना पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन सहित यूरोप में कारपेट व जूट वाल हैंगिंग की मांगों में काफी कमी आई है। पूर्वांचल में कारपेट, वाल हैंगिंग, दरी, बनारसी साड़ी, हैंडीक्राफ्ट, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी के खिलौने की एक हजार से अधिक इकाइयां चल रही हैं। रूस-यूक्रेन तनाव ने कम समय में ही 25 फीसदी कारोबार प्रभावित कर दिया है। 200 करोड़ रुपये का आर्डर रुका हुआ है। व्यापारियों का मानना है कि दोनों देशों में तनाव से ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, स्पेन सहित अन्य देशों में भी निर्यात प्रभावित होगा।
पश्चिमी देशों के साथ ही रूस में भी पूर्वांचल में निर्मित वस्तुओं का निर्यात होता हैं। दोनों देशों के मध्य युद्ध की स्थिति में निर्यात तो प्रभावित होगा ही इसका असर कोरोना की मार झेल चुके उद्यमियों पर पड़ेगा।
– राजेश कुमार सिंह, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती काशी संभाग, कृषि यंत्र निर्यातक।
इन देशों में हमारे यहां से कारपेट, दरी, हैंडीक्राफ्ट का निर्यात बड़े स्तर पर किया जाता है। युद्ध होने की आशंका का असर निर्यात पर पड़ने लगा है। 25 से 30 फीसद आर्डर कम हो गए हैं। कोरोना के कारण पहले से ही उद्यमी परेशान हैं।
– दीनानाथ बरनवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष लघु उद्योग भारती उत्तर प्रदेश कारपेट निर्यातक।
दोनों देशों के मध्य तनाव को देखते हुए बड़ी मात्रा में निर्यात के आर्डर निरस्त हुए हैं। पूर्व में हुए निर्यात का भुगतान भी रुक गया है, जिससे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को उद्यमियों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देना चाहिए, अन्यथा बनारसी साड़ी तथा हैंडलूम के निर्यातक उद्यमी उद्योग बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
– सर्वेश श्रीवास्तव, संयोजक ग्राम शिल्पी प्रकोष्ठ लघु उद्योग भारती काशी, निर्यातक।
बनारसी साड़ी उद्योग अभी कोरोना से पूरी तरह उभरा भी नहीं था, धीरे-धीरे निर्यात बढ़ रहा था कि इन दोनों देशों के मध्य युद्ध की आशंका ने फिर से उद्योग को बंदी की तरफ धकेल दिया है। अभी के ताजा घटनाक्रम का असर पड़ना शुरू हो गया है। इन देशों को होने वाले निर्यात का घटना शुरू हो गया है।
– अनिल बहल, उपाध्यक्ष, वस्त्र डिवीजन लघु उद्योग भारती काशी, बनारसी साड़ी निर्माता।

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