*राष्ट्रीय बालिका दिवस*
*National Girl Child Day)*
*24 जनवरी*
24 जनवरी के दिन इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है। इस दिन इंदिरा गांधी पहली बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठी थी इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया गया है। आज की बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है चाहे वो क्षेत्र खेल हो या राजनीति, घर हो या उद्योग। राष्ट्रमण्डल खेलों के गोल्ड मैडल हो या मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के पद पर आसीन होकर देश सेवा करने का काम हो सभी क्षेत्रों में लड़कियाँ समान रूप से भागीदारी ले रही है।
*राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत 2008 से की गई।* सरकार ने इसके लिए 24 जनवरी का दिन चुना क्योंकि यही वह दिन था जब 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इस अवसर पर सरकार की और से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। समाज में बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक बनाने के लिए अनेको आयोजन होते हैं।
हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या की वजह से लड़कियों के अनुपात में काफी कमी आयी है। पूरे देश में लिंगानुपात 940 : 1000 है। एशिया महाद्वीप में भारत की महिला साक्षरता दर सबसे कम है। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में 6 से 14 साल तक की ज्यादातर लड़कियों को हर दिन औसतन 8 घंटे से भी ज्यादा समय केवल अपने घर के छोटे बच्चों को संभालने में बिताना पड़ता है। इसी तरह, सरकारी आंकड़ों में दर्शाया गया है कि 6 से 10 साल की जहां 25 प्रतिशत लड़कियों को व 10 से 13 साल की 50 प्रतिशत से भी ज्यादा लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है। एक सरकारी सर्वेक्षण में 42 प्रतिशत लड़कियों ने यह बताया कि वे स्कूल इसलिए छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें घर संभालने और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने को कहते हैं।
*हम अनेकों अवसरों पर कन्या का पूजन करते हैं लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेती है तो मातम का माहौल बना लेते हैं। यह हालात भारत के हर हिस्से में हैं। हरियाणा और राजस्थान के हालात तो इतने खराब हैं कि यहां बच्चियों को अभिशाप तक माना जाता है। कन्याओं को अभिशाप मानने वाले यह भूल जाते हैं कि वह उस देश के वासी हैं जहां देवी दुर्गा को कन्या रूप में पूजने की प्रथा है। जो लोग कन्याओं को बोझ मानते हैं उन्हें ही सही मार्ग बताने और कन्या-शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।*।
संतोष काण्डपाल

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