April 16, 2026

रामगंगा नदी के बहाव क्षेत्र में सतर्कता बरतने की हिदायत डैम प्रशासन ने राज्य के 4 मण्डल व 7 जिलों जारी की चेतावनी-

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*रामगंगा नदी के बहाव क्षेत्र में सतर्कता बरतने की हिदायत डैम प्रशासन ने राज्य के 4 मण्डल व 7 जिलों जारी की चेतावनी*

 

अफजलगढ़़ (बिजनौर) वर्षाकाल के दौरान बाढ की आशंका के मद्देनजर कालागढ स्थित रामगंगा बांध प्रशासन द्वारा बाढ चेतावनी जारी करते हुये यूपी के चार मण्डलों सहित सात जनपदों के प्रशासनिक तथा सम्बंधित विभागीय अधिकारियों से रामगंगा नदी के बहाव क्षेत्र में सतर्कता बरतने को कहा गया है।

रामगंगा बांध मण्डल के अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार द्वारा जारी बाढ चेतावनी में यूपी के जिला बिजनोर, मुरादाबाद, ज्योतिबाफूले नगर, रामपुर, शाहजहांपुर तथा फर्रूखाबाद के जिलाधिकारियों के अलावा मेरठ, मुरादाबाद, बरेली व कानपुर के मण्डलायुक्तों तथा पुलिस उपमहानिरीक्षकों से कहा गया है कि रामगंगा बांध निर्माण के बाद जा सामान्य की धारणा बन गयी है कि अब नदी में बाढ नहीं आयेगी। जिसके चलते लोगों ने नदी के बहाव क्षेत्र में खेती का विस्तार कर लिया है।

सितम्बर 1978 तथा 1990 के अलावा 2010 में जलाशय भरा होने के कारण नदी में बाढ आने की दशा में रामगंगा नदी के जलको बांध से नीचे नदी में ही छोडना पडा था। जिससे नदी के बहाव क्षेत्र में स्थित खेती तथा इसके आसपास स्थित काफी आवादी को काफी क्षति हुई थी। इसके अलावा कहा गया है कि इसके साथ ही ग्रामीणों द्वारा नदी की तलहटी में भी खेती शुरू करके व्यापक रूप से नदी के बहाव क्षेत्र को बाधित कर दिया गया है।

बांध प्रशासन द्वारा अपरिहार्य परिस्थितियों में हरेवली बैराज तथा शेरकोट स्थित खो बैराज से भी पानी की निकासी किये जाने की सम्भावना व्यक्त की गयी है।

बीते वर्षो की तरह इस वर्ष भी बाढ से निपटने के लिये मानसून से पहले रामगंगा बांध मण्डल द्वारा जारी चेतावनी में वर्षाकाल से पूर्व ही बाढ से सुरक्षा के प्रबंध करके रामगंगा नदी क्षेत्र के बाढ से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों को सूचित करके उनको समय रहते नदी के बहाव क्षेत्र से हटाने के लिये कहा गया है। जिससे जान व माल की हानि न हो तथा कानून व्यवस्था बनी रहे।

जलाशय की अधिकतम निर्धारित भण्डारण क्षमता 365.300 मीटर है। लेकिन जलाशय का जलस्तर 355 मीटर होने की स्थिति में इसकी सूचना तत्काल सम्बंधित प्रशासनिक अधिकारियों को उपलब्ध करा दी जायेगी। ताकि समय रहते सम्भावित प्रभावित क्षेत्रों में बाढ सुरक्षा की व्यवस्था की जा सके। इसके अलावा परिपत्र में कहा गया है कि जलाशय का जलस्तर 355 मीटर होने के बाद किसी भी समय नदी में पानी छोडने की आवश्यकता हो सकती है।

 

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कालागढ। डैम प्रशासन के मुताबिक रामगंगा नदी के बहाव क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ के खतरों से निपटने के लिये बांध प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष वर्षाकाल शुरू होने से पहले बाढ चेतावनी जारी की जाती है। इसके अलावा उन्होंने सम्भावित बाढ का वर्गीकरण करते हुये कहा कि 25 हजार से 75 हजार क्यूसेक पानी छोडे जाने पर निम्न बाढ, 75 हजार से 1 लाख 25 हजार क्यूसेक पानी छोडे जाने पर मध्यम बाढ, 1 लाख 25 हजार से 1 लाख 75 हजार क्यूसेक पानी छोडे जाने पर ऊंची बाढ तथा 1 लाख 75 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोडे जाने पर अत्यंत ऊंची बाढ आ सकती है।

 

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कालागढ। रामगंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के चमोली जिलातंर्गत स्थित हिमालय की पर्वत श्रृंखला से होता है तथा वह अपने उद्गम स्थल से करीब 125 किमी. की दूरी तय करने के बाद पौडी जिले की सीमा के अंतर्गत कालागढ के सीमावर्ती मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है।

कालागढ के समीप रामगंगा नदी पर बने रामगंगा बांध जलाशय में पानी का भण्डारण करके वर्षाकाल के बाद इस पानी का उपयोग सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन के लिये किया जाता है।

 

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कालागढ। बांध प्रशासन द्वारा वर्षाकाल के दौरान सम्भावित बाढ के खतरों से निपटने के लिये हर स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। बांध के कैचमेंट एरिया में स्थित वायरलैस केन्द्रों को पूरी तरह दुरूस्त कराये जाने सहित डैम के सिलैण्ड्रीकल गेट बंद कर जल का भण्डारण शुरू किया जाता है। जिसके बाद कालागढ डैम से पानी की निकासी पूरी तरह बंद हो जायेगी। वर्षाकाल के दौरान विभागीय कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिये जाते हैं।

 

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कालागढ। बांध प्रशासन द्वारा जारी बाढ चेतावनी में बताया है कि वर्ष 2010 के दौरान 18 सितम्बर 2010 को जलाशय का जलस्तर 363.600 मीटर था। लेकिन जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अचानक अतिवृष्टि के चलते अगले दिन ही 19 सितम्बर 2010 को बांध से जलाशय से करीब दो लाख क्यूसेक पानी नीचे की ओर नदी में छोडना पडा था। अचानक भारी मा़ा में पानी छोडे जाने से खेती तथा आवादी को सामान्य से अधिक हानि हुई थी।