October 21, 2026

यूपी लोक सेवा आयोग से बड़ी खबर- अजय मिश्रा

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*प्रयागराज*

 

यूपी लोक सेवा आयोग से बड़ी खबर,

 

जीआइसी प्रधानाचार्य पद पर चयनित 14 अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन निरस्त,

 

आयोग ने नियमानुसार अनुभव प्रमाण पत्र न देने वाले सशर्त चयनित 14 अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन निरस्त,

 

पीसीएस-2018 के तहत किए गए थे चयनित,

 

कोर्ट के आदेश पर लोक सेवा आयोग ने जारी किया संशोधित परिणाम,

 

सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद आयोग ने संशोधित किया रिजल्ट,

 

इनकी जगह अवशेष श्रेष्ठता सूची से 14 अभ्यर्थियों का किया गया चयन,

 

जिन्होंने साक्षात्कार की तारीख पर वांछित अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था,

 

आयोग की वेबसाइट में अभ्यर्थन निरस्त होने की जानकारी अपलोड,

 

जिनका चयन हुआ है उन अभ्यर्थियों का रोल नंबर भी अपलोड कर दिया गया है,

 

आयोग ने पीसीएस-2018 के तहत विभिन्न विभागों में 988 पदों की भर्ती निकाली थी,

 

इसमें जीआइसी प्रधानाचार्य के 83 पद शामिल थे,

 

भर्ती के विज्ञापन में प्रधानाचार्य पद के अभ्यर्थियों को संयुक्त निदेशक शिक्षा से अनुभव प्रमाणपत्र लाना अनिवार्य था,

 

लेकिन 33 चयनितों ने अनुभव प्रमाण पत्र नहीं दिया था,

 

इनका चयन सशर्त किया गया था,

 

 

इसमें 14 ऐसे चयनित थे, जिन्होंने आयोग को अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया,

 

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि बिना अनुभव, कम अनुभव, जिला स्तर के अधिकारी से अनुभव प्रमाण पत्र बनवाने वाले व कम आयुसीमा के अभ्यर्थियों का चयन किया गया है,

 

अभ्यर्थी अशोक कुमार व अन्य ने इसी आधार को आधार बनाकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी,

 

हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2021 को जीआइसी प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को दोषपूर्ण बताया था,

 

कोर्ट ने कहा कि चयन सूची में उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल किया जाए जो पद की योग्यता रखते हैं,

 

और साक्षात्कार के समय तक संयुक्त निदेशक से प्रति हस्ताक्षरित तीन वर्ष का अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया हो।

 

परिणाम संशोधित न होने पर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी,

 

उसकी सुनवाई 15 जुलाई को होनी थी।

 

इसके पहले 13 जुलाई को आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की,

 

लेकिन अभ्यर्थियों ने 12 जुलाई को ही कैविएट दाखिल कर दिया था,

 

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई को आयोग की एसएलपी खारिज कर दिया,

 

जिसके बाद आयोग को रिजल्ट संशोधित करना पड़ा।