April 21, 2026

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को सलाह, विदेश मंत्रालय ने कहा- सावधानी बरतें, बेवजह का जोखिम न उठाएं-

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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को सलाह, विदेश मंत्रालय ने कहा- सावधानी बरतें, बेवजह का जोखिम न उठाएं

 

 

 

नई दिल्ली: युद्ध प्रभावित यूक्रेन (Ukraine) और उसके सीमावर्ती देशों में फंसे भारतीय नागरिकों और छात्रों (Indian Students) को निकालने के लिए प्रयास जारी हैं. इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन छात्रों से पर्याप्त सावधानी बरतने और बेवजह का जोखिम उठाने से बचने की सलाह दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट करते हुए इंडियन स्टूडेंट्स से यह अपील की है.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, हम सूमी, यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर बहुत चिंतित हैं. हमने छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल युद्धविराम के लिए कई चैनलों के माध्यम से रूस और यूक्रेन की सरकार पर दबाव डाला है. विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार छात्रों के संपर्क में हैं. हमने छात्रों को सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें और शरणार्थी शिविर के अंदर ही रहें व बेवजह का जोखिम उठाने से बचें.

 

 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का ट्वीट (Image- Twitter)

बता दें कि रूस ने शनिवार को यूक्रेन के कुछ हिस्सों में संक्षिप्त युद्ध विराम की घोषणा की है. रूस की समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने रूस के रक्षा मंत्रालय के हवाले से कहा कि, “आज 5 मार्च को सुबह 10 बजे रूस ने युद्धविराम की घोषणा की और मारियुपोल और वोल्नोवाखा से नागरिकों के बाहर निकलने के लिए मानवीय गलियारे खोले हैं.

 

 

 

वहीं यूक्रेन में फंसे इन छात्रों को निकालने की कोशिशें जारी हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि, ‘उन्होंने खारकीव में पिसोचिन से 298 भारतीय छात्रों को निकालने के लिए बसों की व्यवस्था की है.’खास बात है कि भारतीय अधिकारियों ने गुरुवार और शुक्रवार को पांच बसों के जरिए दर्जनों छात्रों को पिसोचिन से निकाला है. उन्हें यहां से लीव और मोलडोवा सीमा ले जाया गया था.

 

 

इससे पहले मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि सरकार का मुख्य ध्यान पूर्वी यूक्रेन युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे भारतीय को सुरक्षित रूप से निकालना है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें खारकीव में अनुमानित 300, सुमी में 700 से ज्यादा और करीब 1000 भारतीय पिसोचिन में फंसे हैं.