महापुरुषों का सत्संग वह जल हैं जिसमे कौआ स्नान करके हंस बनकर निकलता है-जयगुरुदेव*
*कौशाम्बी* चरवा मंझनपुर 23 दिसम्बर को जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज की अगुवाई में निकली 80 दिवसीय 6 प्रान्तीय शाकाहार सदाचार एव मछनिषेध आध्यात्मिक जनजागरण यात्रा अपने चौथे पड़ाव ग्राम काजू की पहुची कल सांयकाल यहाँ उपस्थित सत्सागी धर्म प्रेमी भाई बहनो ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया गुरुवार को यहाँ आयोजित जय गुरुदेव सत्संग समारोह में पंकज जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा महापुरुषों का सत्संग वह जल हैं जिसमे कौआ स्नान करके हंस बनकर निकलता है सत्संग में किसी ब्यक्ति की जाति धर्म महजब की निंदा आलोचना नही की जाती बल्कि यहाँ तो प्रभु की भक्ति की प्रेरणा दी जाती हैं उन्होंने कहा जब हम संसार मे पैदा हुये तो न तो कोई जाति बिरादरी लेकर न नाम लेकर आये जब बड़े हुये तो अपना फैलाव कर लिया धन दौलत नाते रिस्ते बना लिया इस दुनिया को अपना मान बैठे दुनिया की ऐशो इशरत शराबों कबाबों में इंसान सुख ढूंढने लगा चरित्र पतन जैसे कार्यो को करते हुये मानव कैसे सुख प्राप्त कर सकेगा परमात्मा का भजन भक्ति का जो काम करना था उसे भूल गये जबकि परमात्मा ने बड़ी दया करके यह मानव तन आत्मा कल्याण करने के लिए दिया है। उन्होंने कहा प्रभु संतों महात्माओ फकीरों को अपने देश से लोगों को समझने चेताने के लिए भेजते हैं वे यहाँ आकर मानव जीवन पाने का असली उददेष्य बताते हैं साथ ही जब वे साधन करके दैवी लोको में जाते हैं तो खोटे बुरे कर्मो के करने वाले जीवों को नार्को में मिल रही कठोर यातनाओं को देखते हैं तो बहुत दुःखी होते हैं इसलिए वे अपनी वाणियो में उनका वर्णन करते हैं
महाराज जी ने बताया कि मनुष्य शरीर असली हरि मंदिर हैं वह परमात्मा जब भी मिलेगा अपने इसी वजूद के अंदर मिलेगा परमात्मा की भजन भक्ति ख़ुदा की इबादत के लिए शाकाहारी सदाचारी तथा नाशो से मुक्त होने जरूरी हैं वर्तमान में समाज में हिसा व अपराध की बाढ़ती प्रव्रत्ति अशुद्ध खान पान के कारण है हमारी आप से अपील हैं आप सभी मानव धर्म मानव कर्म अपनाये मानव धर्म क्या है एक दूसरे से प्रेम करे निःस्वार्थ भाव से एक दूसरे की सेवा करे दयावान बने बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी ने कलयुग में सरल साधन सुरत शब्द योग नाम योग का उपदेश किया और समझाया कि इस कलयुग में साधना की तीन ही किया सुमिरन ध्यान भजन हैं नाम का मौन जप सुमिरन हैं दृष्टि को एकाग्र करके नौ दरबाजे पर फैली आत्मा की शक्ति का सिमटाव कर आखो के मध्य भाग में लाना ध्यान हैं दोनों कानो के मध्य में वह जलवा हो रहा है जिसे देखकर बड़े बड़े मुनि ऋषि योगी पीर पैगम्बर औलिया कुर्बान हो गए सन्त जन इसके आगे जाते हैं इसलिए भाई बहनों अपने आत्मकल्याण की कुछ चिंता करके भगवान की भी याद करे महाराज जी जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आगामी 18 मार्च 20 से 22 मार्च तक आयोजित होने वाले होने वाले सत्संग में पधारने का निमंत्रण दिया इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत जिला कौशाम्बी के जिलाध्यक्ष घनश्याम सिंह विधायक संजय कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहेl

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