*मण्डल में कोविड मरीज़ों का दर्द, कैसे बचेगी जान, हर शख्स परेशान*
बाँदा/चित्रकूट। कोरोना के इस भयावह काल में चारो तरफ हाहाकार मची हुई है, महज़ 20 दिनों के आंकड़ो ने ब्राज़ील और चाइना की पहली लहर के आंकड़ो को भी हिंदुस्तान ने तोड़ दिया है। हर तरफ चीख पुकार और अपनों को खोने का गम छाया हुआ है। कोई ज़मीनों-आसमां के मालिक से ज़िन्दगी की भीख मांग रहा है तो कोई धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों के देहरी पर मदद की गुहार लगा रहा है। जिस क्रम में अधिकांशतः चिकित्सक मरीज़ों की सेवाओं के लिए अपनी ज़िंदगी ज़ोखिम में डाल रहे हैं तो कुछेक झोलाछाप इस मौक़े का फायदा उठाकर रातो रात अमीर हुए जा रहे हैं। दवाओं की किल्लत भी शहर में बढ़ती जा रही है सूत्रों की माने तो इस महामारी के दौर में हर छोटी बड़ी दवा फर्म रोज़ाना 3 लाख से अधिक की बचत का धंधा खड़ा कर रहे हैं। न दवाओं का बिल है न ही कोई खरीददारी का रिकॉर्ड क्योंकि दवा दुकानों तक आई और कब गायब हो गई इसका कोई आंकड़ा भी नहीं ऐसे में कम दर की दवाओं को औने पौने दाम में लाकर गरीबो और ज़रूरतमन्दों की गर्दन पर रेती चलाई जा रही है। खैर एन-केन प्रकारेण मरीज़ों की तक़लीफ़ दूर भी हो रही है इसी बात से राहत हो जाती है। वहीं हम बात करें कोरोना मरीज़ों की तो चित्रकूटधाम मडंल के सबसे बड़े कोविड ट्रीटमेंट सेंटर मेडिकल कॉलेज बाँदा की जहाँ मरीज़ों को सुविधाओ के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति की जा रही है। ऑक्सीजन के नाम पर पूरे भारत मे त्राहिमाम त्राहिमाम मचा हुआ है। सरकारे भी ऑक्सीजन के लिए पुरजोर कोशिशें भी कर रही है लेकिन मेडिकल कॉलेज बाँदा प्रबंधन वक्त में मरीज़ों तक ऑक्सीजन सिलेंडर न भेजकर उन्हें मौत के दीदार करवाने का हर सम्भव प्रयास कर रहा है। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन होने के बावजूद प्रबंधन द्वारा मरीज़ों की हालत को देखते हुए ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करवाई जा रही बल्कि अपने परिचित या सिफारिश वाले मरीज़ों को प्रथम वरीयता देते हुए ऑक्सीजन या अन्य चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया करवा मरीज़ों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। ऐसे में कॉलेज के प्राचार्य डॉ मुकेश यादव कॉलेज को प्रदेश का अव्वल दर्जे का मेडिकल कॉलेज बताकर सीना चौड़ा किये फूले नहीं समा रहे हैं। वहीं पीएम, सीएम, मंडलायुक्त और ज़िलाधिकारी बाँदा के अनुसार ऑक्सीजन की कोई कमी न होने का बेफिक्री से दम्भ भरा जा रहा है। कोविड संक्रमण के चलते कोई उच्चाधिकारी कॉलेज प्रांगण में जाकर ज़मीनी हक़ीक़त जानने की हिम्मत नही जुटा पा रहा है, और करे भी कैसे हर किसी को अपनी ज़िंदगी प्यारी है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन अधिकारियों को हवा में कागजी कोरम पूरा करके कॉलेज में सारी सुविधाएं होने का दावा कर रही है। सुविधाओ की कमियां और खामियां देख मरीज़ का आत्मबल कमज़ोर हो रहा है और यही वजह है कि हर रोज़ मौतों का आंकड़ा चित्रकूटधाम मण्डल के आंसुओ को बहाये जा रहा है। वही बात की जाए चित्रकूट के कोविड चिकित्सालय खोह की तो यहां भी ऑक्सीजन जैसी तमाम कमियाँ मरीज़ों के लिए खतरे का सबब बनती जा रही है। आपको बता दें कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चित्रकूट के कोविड सेंटर में सुविधाएं अधिकांशतः होने के बावजूद ये सेंटर रिफर सेंटर बना हुआ है, वजह है जनपद में चिकित्सीय शक्ति की कमी होना। जनपद में मात्र 2 एनेस्थेटिक्स चिकित्सक है जिसमे एक कोविड से ग्रसित है और दूसरे एक अन्य अकेले है। अब ऐसे में एक एनेस्थेटिक्स गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के वक़्त वहां मौजूद रहे या फिर कोविड के वेंटिलेटर बेड को ऑपरेट करे। ऐसे में यहाँ मरीज़ों को सरकारी ख़ाका सजाने के लिए भर्ती किया जाता है और हालात बेकाबू होने पर बाँदा मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया जाता है। इस आलम में ज़िन्दगी और मौत से जूझ रहा कोविड मरीज़ चित्रकूट से बाँदा की दूरी तय करते हुए बीच राह में ही दम तोड़ देता है और पहुँच भी गया तो मेडिकल कॉलेज के हालातों के आगे शमशान का सफर भी तय कर लेता है।
हो सकता है जिम्मेदारों के लिए यह बातें तीर की तरह हो लेकिन ज़रूरत है इन बातों पर अमल और अपना दखल करने की जिससे ज़िन्दगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीज़ों की जिंदगियां बचाकर सरकारी वाहवाही से बेहतर है मरीज़ों और तीमारदारों की दुआएं कमाए।
*रिपोर्ट अभिलाष राम चित्रकूट*




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