*🙏वसुधैव कुटुंबकम्🙏*
नमो ब्रह्मण्यदेवाय ,
गो ब्राह्मणहिताय च ।
जगत्हिताय कृष्णाय ,
गोविन्दाय नमो नमः ।।
*ब्रह्मणत्व से सुशोभित सभी ब्राह्मणों एवं गौमाता के सम्मान में सादर समर्पित*
🔅”ब्राह्मण” जप से पैदा हुए शक्ति का नाम है ।
🔅”ब्राह्मण” त्याग से चलते हुए भक्ति का नाम है ।
🔅”ब्राह्मण” ज्ञान के दीप को जलाने का नाम है ।
🔅”ब्राह्मण” विद्या का प्रकाश फैलाने का नाम है ।
🔅”ब्राह्मण” स्वाभिमान से जीने का नाम है ।
🔅”ब्राह्मण” सृष्टि का अनुपम, अमिट, अविरल, अंग है ।
🔅”ब्राह्मण” विकराल हलाहल पीने की कला है ।
🔅”ब्राह्मण” ज्ञान, भक्ति, त्याग, परमार्थ का प्रकाश है ।
🔅”ब्राह्मण” शक्ति, कौशल, पुरुषार्थ का आकाश है ।
🔅”ब्राह्मण” न धर्म , न जाति में बंधा हुआ इंसान है ।
🔅”ब्राह्मण” मनुष्य के रूप में साक्षात् वरदान है ।
🔅”ब्राह्मण” कंठ में शारदा लिए ज्ञान का संचारक है ।
🔅”ब्राह्मण” हाथ में शस्त्र लिए आतंक का संहारक है ।
🔅”ब्राह्मण” सिर्फ मंदिर में पूजा करता हुआ पुजारी नहीं । “ब्राह्मण” घर-घर भीख मांगता हुआ भिखारी भी नहीं ।
🔅”ब्राह्मण” गरीबी में सुदामा सा सरल है ।
🔅”ब्राह्मण” त्याग में दधिचि सा विरल है ।
🔅”ब्राह्मण” विषधरों के शहर में शंकर के समान है ।
🔅”ब्राह्मण” के हस्त में शत्रुओं के लिए परशु कीर्तिमान है ।
🔅”ब्राह्मण” सूखते रिश्तों की संवेदनाओं को सजाता है ।
🔅”ब्राह्मण” निषिद्ध गलियों में सहमे सत्य को बचाता है ।
🔅”ब्राह्मण” संकुचित विचारधाराओं से परे एक नाम है
🔅” ब्राह्मण” सबके अंतःस्थल में बसा एक अविरल राम है ।
*कर्म की भूमि पर किस्मत के फूल खिलते हैं ।*
*स्वार्थ नहीं,परमार्थ के लिए ब्राह्मण के घर जन्म मिलते हैं ।*
अपने सनातन पर जो भी ॠषि मुनि हुए हैं, उनका कोटि-कोटि वंदन करें कि उन्होंने आपको धरोहर के रूप में ज्ञान के साथ वो सारी चीजें दी हैं , जो मनुष्य के लिए कल्याणकारी हैं ।
*🙏सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय🙏*
सुशील झा





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