38 साल की राजनीति में बसपा का अब तक सबसे खराब प्रदर्शन*
*भाजपा की तरफ शनै शनै घिसक रही दलित वोट की गठरी*
*अब तक सुबे की तीसरी शक्ति थी बसपा पर अब हो गई फिसड्डी*-
*रसड़ा से भी इस बार हार रहे थे उमाशंकर ,भाजपा ने किसी तरह बचाई लाज*
*विनय राय संपादक*,
*लखनऊ* इस बार के विधान सभा चुनाव में अगर सबसे ज्यादा नुकसान एव बेइज्जती उठानी पड़ी तो बसपा रही है। पार्टी का सबसे खराब पर्दशन होने से इसके कई पदाधिकारियों का दल से मोह खत्म हो गया है और वे लोग बीजेपी की राह तलाश रहे है। बसपा के पिछले कुछ सालों के चुनावी परिणामों का अध्ययन करने से यह साफ पता चल रहा है कि गठन से 38 साल की राजनीति में बसपा अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती जिस वोट बैंक के दम पर अपनी शर्तों पर राजनीति करती रहीं, वह भी अब खिसकता नजर आ रहा है।
कुछ जानकार तो यह भी कर रहे हैं कि बसपा का दलित वोट बैंक भाजपा में अपने को सुरक्षित पाते हुए उनके साथ जाता नजर आ रहा है। पिछले चनाव में 22 फीसदी वोट पाने वाली बसपा 2022 के चुनाव में मात्र 12.08 प्रतिशत पर ही गई।
हस्तिनापुर सीट पर बसपा पिछले चुनाव में नंबर दो पर थी और

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