कौशिक वगाडिया CIB चीफ —
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने मांग की कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में राज्य सरकार तत्काल पेसा नियमावली लागू करे और ग्रामीण संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को पूर्ण कानूनी अधिकार जल्द हस्तांतरित करे। उन्होंने आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा उच्च न्यायालय में दायर उस याचिका पर यह टिप्पणी की है, जिसमें राज्य में अबतक पेसा नियमावली लागू नहीं करने की शिकायत की गई है।
रविवार को बयान जारी कर उन्होंने कहा कि गैर अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होनेवाली व्यवस्था को ही अधिसूचित क्षेत्रों की पंचायतों के लिए रख दिया गया है। इसके कारण राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करनेवाली जनता को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा पेसा एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 243 (एम) के अनुसार पंचायत संबंधी प्रावधान राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में सीधे तौर पर लागू नहीं किए जा सकते। पेसा एक्ट के प्रावधानों से यह स्पष्ट है कि झारखंड राज्य के अधिसूचित क्षेत्रों के गांवों के संबंध में पारंपरिक ग्राम प्रधानों, मानकी, मुंडा तथा प्रावधान के अनुसार संस्थाओं को सारी योजना, लघु खनिज, बालू घाट इत्यादि के संबंध में पूर्ण अधिकार दिया जाना है। परंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि जल, जंगल, जमीन की बात करने वाली झामुमो-कांग्रेस सरकार राज्य के आदिवासियों के साथ नाइंसाफी कर रही है। पेसा नियमावली को लागू करने में जान बूझकर विलंब किया जा रहा है। इनके द्वारा वास्तव में प्रशासनिक तथा अधिकारिक व्यवस्था के जरिए संसाधनों का इस्तेमाल धन कमाने के लिए किया जा रहा है।

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