October 25, 2026

दुष्कर्म का मामले में युवक को अग्रिम जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान खर्च का वहन करना आपराधिक मामला नहीं- अजय मिश्रा

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दिल्ली

 

दुष्कर्म का मामले में युवक को अग्रिम जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान खर्च का वहन करना आपराधिक मामला नहीं है, फिर चाहे खर्च का वहन एक व्यक्ति करे या दोनों मिलकर। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की पीठ ने पीड़ित युवती के उस बयान पर असहमति जताई कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान आरोपित ने उस पर खर्च का दबाव बनाया और उसने 1.25 लाख रुपये खर्च किए थे।

 

पीठ ने कहा कि जहां दोनों लोग एक साथ रहते है, वहां ऐसा नहीं है कि केवल एक साथी को खर्च वहन करना पड़ता है। अगर, खर्च एक व्यक्ति करता भी है तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

 

पीठ ने खर्च का दबाव बनाने की युवती की दलील को खरीज कर दिया। पीठ ने कहा युवती के बयानों से ही यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता राहुल और वह लिव-इन रिलेशनशिप में थे। दोनों ने अपने परिवारों को शादी के लिए राजी किया और शुरू में युवती का परिवार विवाह से सहमत नहीं था। हालांकि बाद में उसके पिता विवाह के लिए सहमत हो गए, लेकिन विवाह क्यों नहीं हुआ इसका कोई कारण नहीं बताया गया।

 

 

कोर्ट ने युवती के मारपीट संबंधी बयानों पर संदेह जताते हुए कहा कि न तो कोई शिकायत है और न ही चिकित्सा रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता उसके साथ मारपीट करता था। पीठ ने लगाए गए आरोप की प्रवित्ति को देखते हुए आरोपित राहुल को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर जमानत दे दी।

 

याचिका के अनुसार, युवती सितंबर 2017 में नौकरी की तलाश में दिल्ली आई थी और यहां उसकी मुलाकात आरोपित राहुल कुशवाहा से हुई थी। आरोप है कि राहुल ने पीड़ित पर उसके माता-पिता को शादी के लिए मनाने का दबाव बनाया। बाद में उसके माता-पिता अगस्त 2019 में शादी के लिए सहमत हो गए।

 

 

युवती ने आरोप लगाया कि राहुल ने उसकी इच्छा के विपरीत यह कहकर शारीरिक संबंध बनाए कि उसके माता-पिता उनकी शादी के लिए सहमत हो गए हैं। ऐसा करने से इन्कार करने पर वह उन्हें मरता था। इस दौरान वह सभी खर्च वहन करती थी।