प्रयागराज : जुमे की नमाज के बाद अटाला में हुए बवाल में पत्थरबाजी करने समेत कई आरोप में गिरफ्तार आधा दर्जन आरोपियों की जमानत अर्जी मजिस्ट्रेट की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं इसलिए जमानत का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। यह आदेश अ्पर सीजेएम अरुण कुमार ने आरोपितों के अधिवक्ताओं एवं अभियोजन अधिकारी अविनाश सिंह के तर्कों को सुन कर दिया।
अभियोजन के तर्क :
अभियोजन अधिकारी ने न्यायालय को बताया यह एक ऐसी घटना है जो सार्वजनिक स्थान पर समूह बनाकर एक दूसरे को उत्तेजित करते हुए एक दूसरे को प्रकोपित करते हुए की गई है। इसके परिणाम स्वरूप वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं तमाम कर्मचारियों को गंभीर चोटें आई हैं लहूलुहान हो गए, इसलिए जमानत का कोई आधार नहीं है।
आरोपितों के तर्क :
आरोपितों की ओर से तर्क दिया गया कि उनके विरूद्ध कोई साक्ष्य नहीं है। घटना करने वालों में वह शामिल नहीं है उन्हें शक और रंजिश के आधार पर झूठा आरोपी बना दिया गया है। कोई बरामदगी उनके पास से नहीं हुई है।
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को नमाज के बाद भारी संख्या में एकत्र लोगों की भीड़ तितर-बितर करने पर प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के लोगों पर पथराव किया गया। इसी आरोप में खुल्दाबाद थाने पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
यह हैं आरोपी :
तौफीक, मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद कादिर ,शाहनवाज, मोहम्मद रिजवान , सैफ।





More Stories
शुआट्स के कुलाधिपति, कुलपति समेत 11 के खिलाफ चार्जशीट फाइल-
बसपा महापौर प्रत्याशी सईद अहमद के बड़े बेटे के बाद छोटे बेटे पर भी मामला दर्ज-
50 हजार की इनामी शाइस्ता की तलाश में यू पी एस टी एफ टीम ने धूमनगंज पुलिस संग मारा छापा-