*चुनाव के समय कुछ राजनेता अभद्र भाषा का प्रयोग करके आखिर क्या सिद्ध करना चाहते…?*
*अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले की खुद की छवि ही खराब होती*
*जुबान से समाज में इज्जत बढ़ती और जुबान से इंसान की इज्जत मिट्टी में मिलते देर नहीं लगती..!!*
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राजनेताओं को बयानबाजी मर्यादा में रह कर करनी चाहिए मगर समय समय पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के राजनेताओं की बेतुका शर्मनाक और अभद्र बयानबाजी सामने आती रहती है!कई बार तो कुछ राजनेता अपने पद की मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखते हैं! अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले की खुद की छवि ही खराब होती है न कि उसकी जिसके लिए वह प्रयोग की जाती है!ऐसी अभद्रतापूर्ण टिप्पणियों की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है सोचने वाली बात तो यह है कि पार्टी का आला नेतृत्व ऐसी घटिया बयानबाजी करने वालों के लिए सख्ती क्यों नहीं दिखाता? सवाल है कि चुनाव के समय राजनेता अभद्र भाषा का प्रयोग करके आखिर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? क्या व यह सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि व ऐसा करके अपनी विरोधी राजनीतिक पार्टियों के लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश करके आमजन की आंखों में धूल झोंक कर अपना वोट बैंक बढ़ा लेंगे!यह गलत सोच है! बेतुकी अभद्र भाषा को आमजन कभी पसंद नहीं करता!जो विवादित निंदनीय या घटिया बयानबाजी करते हैं उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए कि जुबान से समाज में इज्जत बढ़ती है और जुबान से इंसान की इज्जत मिट्टी में मिलते देर नहीं लगती! इस लिए पहले सोचो समझो फिर बोलो! विश्व के सबसे लोकतंत्र के राजनेताओं को ऐसी अभद्र और घटिया बातें शोभा नहीं देती हैं चुनाव आयोग को भी चाहिए कि वह ऐसी अभद्र और घटिया बातें करने वालों पर लगाम कसने के लिए उचित कदम उठाए।
*🙏🏻🙏🏻💥💥समीर, (विक्की*

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