August 13, 2026

चंपत राय जी के ऊपर लगाए गए आरोप का खंडन करता है जय भारत मंच : राष्ट्रीय महासचिव पुष्पराज तिवारी

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*अरे ओ सिनेमाहाल के टिकट ब्लैकिए संजय सिंह आ तूझे बताये कि श्री चंपतरायजी (सचिव राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) कौन है…? जिन पर तुने झूठे और राजनीति से प्रेरित आरोप लगायें है…*

*१९७५ इंदिरा गाँधी द्वारा थोपे गए आपातकाल के समय बिजनौर के धामपुर स्थित आर एस एम डिग्री कॉलेज में एक युवा प्रोफेसर चंपतराय बंसल, बच्चों को फिजिक्स पढ़ा रहे थे तभी उन्हें गिरफ्तार करने वहां पुलिस पहुंची क्योंकि वह संघ से जुड़े थे…*

*अपने छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय चंपतराय जानते थे कि उनके वहाँ गिरफ्तार होने पर क्या हो सकता है पुलिस को भी अनुमान था कि छात्रों का कितना अधिक प्रतिरोध हो सकता है प्रोफ़ेसर चंपत राय ने पुलिस अधिकारियों से कहा, आप जाइये में बच्चों की क्लास खत्म कर थाने आ जाऊँगा पुलिस वाले इस व्यक्ति के शब्दों के वजन को जानते थे अतः वे लौट गए…*

*क्लास खत्म कर बच्चों को शांति से घर जाने के लिए कह कर प्रोफेसर चंपत राय घर पहुँचे माता पिता के चरण छू आशीर्वाद लिया और लंबी जेल यात्रा के लिए थाने पहुंच गए, १८ महीने उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बेहद कष्टकारी जीवन व्यतीत कर जब बाहर निकले तो इस दृढ़प्रतिज्ञ युवा के आत्मबल को संघ के तत्कालीन सरसंघचालक रज्जू भैया ने पहचाना और राममंदिर की लड़ाई के लिए अयोध्याजी को तैयार करने का जिम्मा उनके कंधों पर डाल दिया…*

*चंपतराय जी ने अपनी सरकारी नौकरी को छोड़ दिया और रामकाज में जुट गए, वे अवध के गाँव गाँव गये हर द्वार खटखटाया स्थानीय स्तर पर ऐसी युवा फौज खड़ी की जो हर स्थिति से लड़ने को तत्पर थी अयोध्याजी के हर गली कूचे ने चंपतराय को और हर गली कूचे को उन्होंने भी पहचान लिया उन्हें अवध का इतिहास, वर्तमान, भूगोल की ऐसी जानकारी हो गई कि उनके साथी उन्हें “अयोध्याजी के इनसाइक्लोपीडिया” उपनाम से बुलाने लगे…*

*बाबरी ध्वंस से पूर्व से ही चंपतराय ने राममंदिर पर “डॉक्यूमेंटल एविडेंस” जुटाने प्रारम्भ किये लाखों पेज के डॉक्यूमेंट पढ़े और सहेजे, एक एक ग्रंथ पढ़ा और संभाला उनका घर इन कागजातों से भर गया, साथ ही हर जानकारी उंन्हे कंठस्थ भी हो गई, के परासरण और वैद्यनाथन आदि वकील साथी जब रामजन्मभूमि की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतरे तो उन्हें अकाट्य सबूत देने वाले यही व्यक्ति थे…*

*६ दिसंबर १९९२ को अयोध्याजी में मंच से बड़े बड़े दिग्गज नेता कारसेवकों को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे थे तमाम निर्देश दिए जा रहे थे कथित बाबरी ढांचे को नुकसान न पहुचाने की कसमें दी जा रहीं थीं उस समय चंपतराय जी मंच से कुछ दूर स्थानीय युवाओं के साथ थे, एक पत्रकार ने जब चंपत राय जी से पूछा “अब क्या होगा.?” तो उन्होंने हँस कर उत्तर दिया “ये राम की वानर सेना है, सीटी की आवाज पर पी टी करने यहां नहीं आयी… ये जो करने आयी है करके ही जाएगी”…*

*इतना कह उन्होंने एक बेलचा अपने हाथ में लिया और बाबरी ढांचे की ओर बढ़ गये, फिर सिर्फ जय श्री राम का नारा गूंजा और… इतिहास रचा गया, आदरणीय चंपत राय बंसल को यूं ही राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव नहीं बना दिया गया है उन्होंने रामलला के श्री चरणों में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया है प्यार से उन्हें लोग “रामलला का पटवारी” भी कहते हैं ये व्यक्ति सनातनी योद्धा हैं यह मुंह फाड़ कर केवल बकवास करने वाले कोई कायर नहीं…*

*बाबरी ध्वंस के मुकदमों में कल्याणसिंह जी के बाद चंपत राय जी ने ही अदालत और जनसामान्य दोनों के सामने सदैव खुल कर उस घटना का दायित्व अपने ऊपर लिया है चम्पत राय जी कह चुके हैं, जैसे ही राममंदिर का शिखर देख लेंगे युवा पीढ़ी को मथुरा की ज़िम्मेदारी निभाने को प्रेरित करने में जुट जाएंगे”…*

*🙏प्रणाम् ऐसे जीवित दधीचि को…🙏*

*जय श्री राम*

जय भारत मंच चंपत राय जी के ऊपर लगाए गए आरोप का खंडन करता है और ऐसी घणित राजनीति करने वाले राजनेताओं की निंदा करता है समाज और राष्ट्र के प्रति जो युवा चिंतित है उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे राजनेताओं का पूरा जोर विरोध करें ऐसे राजनेता सिर्फ देश को गुमराह करने का घणित कार्य करते हैं सामाजिक व धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास करते हैं ऐसे लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं जिनसे आज समाज को बचकर रहना चाहिए और अपनी समझ से काम करना चाहिए चंपत राय जी के ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं वह बेबुनियाद है आप सभी एक बार इनका जीवन दर्शन पढ़ें तो मुझे लगता है कि आप सही मायने पर सत्य क्या है कौन क्या कर सकता है क्या नहीं यह समझने में आसानी होगी।

श्री पुष्पराज तिवारी

राष्ट्रीय महामंत्री जय भारत मंच