September 20, 2026

क्या है? सुलताना डाकू का इस कुए से कनेक्शन-

Spread the love

*…क्या है? सुलताना डाकू का इस कुए से कनेक्शन*

 

“`सन 1924 के इस कुंए के चारों तरफ दीवार बना कर इसे विशालकाय आकार दिया गया था बाहर से पुराने खंडहर जैसे दिखने वाले इस कुंए की दीवारें आज भी अपनी बुलंदी की कहानीया बयांन करती है इस कुंए के सामने वाले रास्ते को काफी वर्ष पहले दीवार खड़ी कर के बंद कर दिया गया था शायद इसलिए कि यहां कोई अनहोनी न हो जाए……….

यह गुमनाम सी धरोहर भले ही आज खंडहर में तब्दील हो चुकी है लेकिन किस्से कहानियों में यह कुंआ आज भी जिंदा है

 

डाकू सुल्ताना ने यहां से सुरंग बनाई थी यह सुरंग डोईवाला तक जाती है कुंए की गहराई इतनी अधिक है कि अगर इसके अंदर कोई पत्थर फेंका जाए तो काफी देर बाद नीचे से टकराने पर इसकी हल्की आवाज ऊपर आती है इसी कुंए के बीच से सुरंग का दरवाजा होने की चर्चा भी कई बार सुनी जाती रही है

 

ऐसा नहीं है कि इस कुएं का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है आज भी इस कुएं के चारों ओर खड़ी इमारत अपनी बुलंदी की तस्वीर बयां करती है अंग्रेजों के जमाने में इस कुएं का निर्माण हुआ था मुगल आर्टिटेक्चर के आधार पर बने इस कुंए के निर्माण में एक तरफ जहां लखोरी ईंट का प्रयोग किया गया है वहीं लेप के रूप में उड़द की दाल का प्रयोग हुआ है इस कुएं की गहराई का अंदाजा आज तक नहीं लगाया जा सका है

 

कुंए के आसपास इस समय की इमारतो का निर्माण हो चुका है यहां आजकल ईस कुएँ से अजीब-अजीब आवाजें आती हैं कहा जाता है कि यहां पर अंग्रेजों द्वारा फांसी दी जाती थी और लाश को इस कुएं में फेंक दिया जाता था सन 1945 के दंगों में भी यहां सैकडों लाशें फेंक दी गई थी

 

कुएं के ठीक पीछे पीडब्ल्यूडी का ऑफिस है। इस ऑफिस का निर्माण 1890 में किया गया था अंग्रेजों के शासन काल में बनी इस ओफिस पर आज भी कई निशां शेष है अंग्रेजों के जमाने में यहां उनके सरकारी घोड़ों का अस्तबल हुआ करता था

 

अगर देहरादून में मौजूद इस विरासत की थोड़ी भी देखभाल लोकल बॉडी कर लेती तो शायद इस पर बहुत कुछ लिखा किया जा सकता था

यह कुंआ किसी हैरिटेज से कम नहीं सरकार को इसकी इंपॉर्टेंस को ध्यान रखते हुए इसका जीर्णोद्वार करवाना चाहिए इसका इतिहास जनता के सामने रखकर संजोने की कोशिश करनी चाहिए ऐसी धरोहरों से इतिहास के करीब जाने का मौका मिलता है।

 

देहरादून में गुमनामी के अंधेरों में कैद कईं ऐतिहासिक विरासते हैं जिसके बारे में शायद ज्यादातर लोग अपरिचित हैं। इन्हीं विरासतों में कैद है यह कचहरी परिसर में स्थित कुआं। लोगों का कहना है कि यह भुतो के कुए के नाम से चर्चित है । यहां से अजीब-अजीब आती है। आवाजे

 

सुल्ताना डाकू का नाम आते ही आंखों के सामने डाकूओं जेसी एक तस्वीर उभरती हैं हाथों मे बँदूक सिर पर पकड़ी जो साहूकारों व जमींदारों को लूटता था। डाकूओं की यह तस्वीर फिल्मों ने पेश की है लेकिन बहुत कम ही लोग जाते हैं कि सुल्ताना जेसे डाकूओं ने देश की गरीब जन्ता मे गरीबो की मदद करने में अहम् भूमिका निभाई। सुल्ताना डाकू को न गरीबो ने केवल असलहा व गोला बारूद मुहैया कराया बल्कि उसको छिपने का स्थान भी दिया।

 

सुल्ताना डाकू अमीरो से लूटता था और ग़रीबों में बांट देता था

 

प्रस्तुति तैय्यब अली

 

“`