May 7, 2026

कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश- अजय मिश्रा

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*भाग-1*

 

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*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*

 

 

 

 

– कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने और गांवों को कोरोना से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वर्तमान में 97,000 से अधिक राजस्व गांवों में वृहद टेस्टिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आज हमारे इस अभियान की सराहना की है। व्यापक जनमहत्व के इस अभियान को पूरी तत्परता के साथ संचालित किया जाए। हर लक्षणयुक्त/संदिग्ध व्यक्ति की एंटीजन जांच की जाए।आरआरटी टीम की संख्या बढ़ाई जाए।

 

 

 

 

– वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ाई में पूरा प्रदेश एकजुट है। जनसहयोग और ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट की नीति के नियोजित अनुपालन के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। प्रदेश में बीते 30 अप्रैल को 3,10,783 एक्टिव कोविड केस थे, जबकि सतत प्रयासों से आज इसमें 95000 से अधिक की कमी हो चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में 2,16,057 एक्टिव कोविड केस हैं। प्रदेश का रिकवरी दर लगातार बेहतर हो रहा है। अब तक 13 लाख 13 हजार से अधिक प्रदेशवासी कोरोना से लड़ाई जीत कर स्वस्थ हो चुके हैं।

 

 

 

 

– बीते 24 घंटों में प्रदेश में 20,463 नए कोविड केस की पुष्टि हुई है, जबकि इसी अवधि में 29,358 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। यह स्थिति संतोषप्रद है। प्रदेश में नए कोविड केस कम हो रहे हैं, जबकि रिकवरी दर बेहतर हो रही है।

 

 

 

 

– उत्तर प्रदेश सर्वाधिक टेस्टिंग करने वाला राज्य है। बीते 24 घंटों में 2,33,705 सैम्पल टेस्ट हुए, जिसमें 1,10,000 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर माध्यम से हुए। अब तक प्रदेश में 4,34,04,184 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं। ‘टेस्ट, ट्रैक ट्रीट’ के मंत्र के अनुरूप कार्यवाही तेजी से की जाए।

 

 

 

 

– विशेषज्ञों के आकलन को दृष्टिगत रखते हुए सभी जिलों में बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने की आवश्यकता है। इस उद्देश्य से सभी जिला अस्पतालों में न्यूनतम 10-15 बेड और मेडिकल कॉलेज में 25-30 बेड की क्षमता वाले पीडियाट्रिक आईसीयू को तैयार कराया जाए। मंडल मुख्यालय पर न्यूनतम 100 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू होना चाहिए। आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण, मेडिसिन आदि की उपलब्धता करा ली जाए। इस संबंध में चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का प्रशिक्षण कराया जाए। यह कार्य तेजी के साथ कराया जाए।

 

 

 

 

– निगरानी समितियां गांवों में घर-घर भ्रमण कर लोगों की स्क्रीनिंग का कार्य कर रही हैं। यह समितियां होम आइसोलेट मरीजों को तथा अन्य संदिग्ध लक्षणयुक्त लोगों को आवश्यकतानुसार मेडिकल किट प्रदान करती हैं। मेडिकल किट वितरण की इस व्यवस्था की सतत निगरानी की जाए। निगरानी समितियां जिन्हें मेडिकल किट दे रही हैं, उनका नाम और फोन नम्बर आइसीसीसी को उपलब्ध कराएं। आइसीसीसी इसका पुनरसत्यापन करे। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी के माध्यम से इसकी एक प्रति स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि सांसद/विधायकगण मेडिकल किट प्राप्त कर स्वास्थ्य लाभ कर रहे लोगों से संवाद कर सकें। इससे व्यवस्था का क्रॉस वेरिफिकेशन भी हो सकेगा। हर संदिग्ध लक्षणयुक्त व्यक्ति की एंटीजन टेस्ट जरूर हो।

 

 

 

 

– सभी जिलों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। एसीएस स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा प्रत्येक दशा में इन उपकरणों को क्रियाशील होना सुनिश्चित कराएं। संबंधित जिलों से संपर्क कर इस संबंध में उनकी समस्याओं का निराकरण कराएं। इसके उपरांत भी यदि वेंटिलेटर/ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्रियाशील न होने की सूचना प्राप्त हुई तो संबंधित डीएम/सीएमओ की जवाबदेही तय की जाएगी।

 

 

 

 

– प्रदेश में रेमेडेसीवीर सहित जीवनरक्षक मानी जा रही सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए रेमेडेसीवीर का दैनिक आवंटन भी बढ़ा दिया है। सरकारी कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन पूर्णतः निःशुल्क है। निजी अस्पतालों को जरूरत के अनुसार डीएम/सीएमओ द्वारा इसकी उपलब्धता कराई जा रही है। सभी जिलाधिकारी और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि जब भी किसी मरीज को यह इंजेक्शन दिया जाए तो वहां नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ एक चिकित्सक भी उपस्थित हो। इस जीवनरक्षक दवा की मांग, आपूर्ति और खपत का पूरा विवरण रखा जाए।

 

 

 

 

– कोरोना से बचाव के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सभी नागरिकों को वैक्सीन का सुरक्षा कवर प्रदान किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक टीकाकरण करने वाला राज्य है। अब तक 1,39,08,152 डोज लगाए जा चुके हैं। 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण अब 18 जिलों में संचालित हो रहा है। 10 मई को इस आयु वर्ग के 50,157 लोग टीका कवर से आच्छादित हुए। इस प्रकार, प्रदेश में 18 से 44 आयु वाले 1.66 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इस आयु वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज भी घटता जा रहा है, वर्तमान में यह 0.6 फीसदी है।

 

 

 

 

– भविष्य की चुनौतियों के दृष्टिगत चिकित्सकीय मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए नियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल/पैरामेडिकल अंतिम वर्ष, इंटर्न, प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके युवा, सेवानिवृत्त अनुभवी लोगों की सेवाएं ली जानी चाहिए। इस संबंध में चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया एक सप्ताह में पूर्ण कर लिया जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्तर से इसकी विस्तृत समीक्षा कर ली जाए।।

 

 

 

*भाग-02*

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*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*

 

– ऑक्सिजन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है। सभी जिलों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जा रही है। विगत 24 घंटे में प्रदेश में 1,011 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का वितरण किया गया है। इसमें रीफिलर को 632 मीट्रिक टन और मेडिकल कॉलेजों को 301 मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई है।वाराणसी, लखनऊ,प्रयागराज, कानपुर जैसे बड़े और अधिक संक्रमण दर वाले जिलों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बेहतर हो रही है। आज 08 टैंकर की नई ट्रेन आ रही है, जबकि 10 टैंकर वाली जीवनरक्षक एक्सप्रेस लखनऊ में खड़ी है। जिलों की जरूरत को देखते हुए इनका समुचित वितरण कराया जाए।गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद के अलावा कम संक्रमण दर वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सभी जिलों के लिए पृथक-पृथक कार्ययोजना बनाकर ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जाए।

 

– क्रायोजनिक टैंकरों की उपलब्धता हेतु ग्लोबल टेंडर जारी किए गए हैं। भारत सरकार द्वारा भी टैंकर उपलब्ध कराई जा रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से अतिरिक्त टैंकर मिल गए हैं। टैंकरों की संख्या सतत बढ़ रही है, इससे ऑक्सीजन आपूर्ति और बेहतर करने में सहायता मिली है।

 

– होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों को ऑक्सिजन आपूर्ति की व्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है। होम आइसोलेशन में उपचाराधीन कोविड मरीजों, लक्षणयुक्त संदिग्ध मरीजों, गंभीर रोग से पीड़ित नॉन कोविड मरीजों अथवा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार जिस भी मरीज के लिए ऑक्सिजन की जरूरत हो, उसे ऑक्सिजन जरूर उपलब्ध कराया गया। इस संबंध में आवश्यक शासनादेश आज ही जारी कर दिया जाए। सभी जिलों में घर पर उपचाराधीन लोगों को ऑक्सिजन की सुचारु आपूर्ति होनी चाहिए। आक्सीजन ऑडिट की रिपोर्ट को देखते हुए आपूर्ति-वितरण में संतुलन बनाया जाए।

 

– आंशिक कोरोना कर्फ्यू को दृष्टिगत रखते हुए रेहड़ी, पटरी, ठेला व्यवसायी, निर्माण श्रमिक, पल्लेदार आदि के भरण-पोषण की समुचित व्यवस्था की जाए। प्रदेश में 350 से अधिक सामुदायिक भोजनालय प्रारंभ हो चुके हैं, इन्हें और बढ़ाये जाने की जरूरत है। सभी जिलों में कम्युनिटी किचेन संचालित किए जाएं। निजी स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सहयोग प्राप्त करना उचित होगा।

 

– ‘सफाई, दवाई, कड़ाई, के मंत्र के अनुरूप प्रदेशव्यापी स्वच्छता, सैनीताइजेशन का अभियान चल रहा है। कल 63080 गांवों में स्वच्छता, सैनीटाइजेशन, फॉगिंग की गई। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। कोरोना कर्फ्यू को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

 

– ऑक्सिजन प्लांट की स्थापना की कार्यवाही तेजी से की जाए। भारत सरकार द्वारा स्थापित कराए जा रहे प्लांट के संबंध में मुख्य सचिव सतत अनुश्रवण करते रहें। आक्सीजन उत्पादन-आपूर्ति में गन्ना विकास और आबकारी विभाग का सहयोग भी मिला है। 70 जिलों में इनके द्वारा आक्सीजन प्लांट लगाने की कार्यवाही की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग के असप्तालों में स्थापित होने वाले प्लांट की कार्यवाही की दैनिक समीक्षा की जानी चाहिए। निजी क्षेत्र द्वारा भी ऑक्सिजन प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं, उन्हें नियमानुसार सभी आवश्यक सहूलियत प्रदान की जाए। कोविड के उपचार हेतु एयर सेपरेटर यूनिट, ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना आदि के संबंध में सांसद/विधायक निधि से सहयोग किया जा सकता है।