August 9, 2026

कोरोना वायरस से जूझ रहे केरल में कौन सा जानलेवा बैक्टीरिया बन गया है सिरदर्द?

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कोरोना वायरस से जूझ रहे केरल में कौन सा जानलेवा बैक्टीरिया बन गया है सिरदर्द?

केरल वो राज्य है जहां देश का पहला कोरोना वायरस (First Case of Coronavirus) केस मिला था और अब कोरोना के खिलाफ जूझते हुए इस राज्य में एक और किस्म के संक्रमण से चिंता के बादल गहरा गये हैं. यह वायरस नहीं बल्कि नए बैक्टीरियल संक्रमण (Bacterial Infection) का मामला है, जिसे माना जा रहा है कि यह जानलेवा हो सकता है और बेहद संक्रामक भी. राज्य में इस संक्रमण के कई मामले तब नज़र आने लगे हैं, जब 11 वर्षीय एक बालक की जान इस बैक्टरीरियल इन्फेक्शन के चलते जा चुकी है. केरल में बेहद चिंताजनक माने जा रहे इस नए संक्रमण (New Infection in Kerala) के बारे में अब तक कुछ ही जानकारियां हाथ लगी हैं.

यह संक्रमण शिगेला नाम के बैक्टीरिया से हो रहा है और इस संक्रमण को शिगेलोसिस कहा जाता है. जिस तरह कोरोना वायरस से पीड़ित में लक्षण कुछ दिनों बाद भी दिख सकते हैं, इसी तरह शिगेला ग्रस्त में भी लक्षण 1 से 2 दिन बाद दिखने शुरू होते हैं. मामूली कोविड रोगियों की तरह ही शिगेला के मामूली रोगी भी बगैर इलाज के ठीक हो सकते हैं. लेकिन गंभीर मामले खतरनाक होकर जानलेवा तक हो सकते हैं. केरल में इस इन्फेक्शन के बारे में जानिए.

1. शिगेला बैक्टीरिया से पीड़ितों में दस्त, बुखार और पेट में दर्द या मरोड़ जैसे लक्षण आम हैं, जो 7 दिनों तक रह सकते हैं.

2. इस बैक्टीरिया संक्रमण का इलाज सामान्य तौर पर एंटीबायोटिक्स से किया जाता है, जिससे संक्रमण फैलने पर भी लगाम लग सकती है.

 

3. शिगेला बैक्टीरिया किसी पीड़ित से दूसरे को तब भी फैल सकता है, जबकि पीड़ित के दस्त के लक्षण इीक हो चुके हों. बहुत कम मात्रा में बैक्टीरिया ही किसी को बीमार करने के लिए काफी होते हैं.

 

4. दूषित खाना या पानी इस संक्रमण के प्रमुख स्रोत बताए जाते हैं. किसी को इस बैक्टीरिया से संक्रमण हो जाए तो इसकी पुष्टि स्टूल टेस्ट से होती है.

5. कोविड-19 की तरह आप इस संक्रमण से साफ-सफाई रखकर बच सकते हैं. अगर आप ठीक तरह से समय समय पर हाथ धोते हैं तो संक्रमण से बचाव संभव है.

6. संक्रमण ग्रस्त व्यक्ति के स्पर्श वाली किसी सतह को छूने से संक्रमण फैल सकता है. साथ ही, यह संक्रमण उस भोजन के सेवन से भी हो सकता है जो किसी संक्रमित व्यक्ति ने बनाया हो.

7. इस बैक्टीरियल संक्रमण से किसी भी उम्र के लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन बच्चों को खतरा ज़्यादा है. केरल में ज़्यादातर संक्रमित बच्चे ही पाए जा रहे हैं. जो लोग लगातार यात्रा कर रहे हैं, उन्हें भी खतरा ज़्यादा होता है. संक्रमित व्रूक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से भी संक्रमण होता है.

क्या यह दूसरी लहर है?

केरल में इस शिगेला के संक्रमण के मामले पिछली साल भी दर्ज हुए थे. 2019 में राज्य के कोइलांडी में इस बैक्टीरिया संक्रमण के सामने आने के बाद मिड डे मील को लेकर साफ सफाई की निगरानी की कवायद की गई थी. 2019 में एक ही स्कूल के 40 बच्चे शिगेला के लक्षणों के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे. इस साल भी एक बच्चे की मौत के बाद पानी के स्थानीय स्रोतों को साफ किया जा रहा है और मृतक बच्चे के कॉन्टैक्ट में आए लोगों की स्थिति भी समझी जा रही है.

गौरतलब है कि दुनिया में हर साल इस बैक्टीरिया से हाने वाले रोगों के कारण 6 लाख तक मौतें होती हैं. अफ्रीका और दक्षिण एशिया में डायरिया के गंभीर मामलों के पीछे चार प्रमुख बैक्टीरिया कारण होते हैं, जिनमें से शिगेला एक है. इस बैक्टीरिया की खोज 1897 में जापानी विशेषज्ञ कियोशी शिगा ने की थी, इसलिए इसका नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया.