हमें अपनी सेना और सरकार पर गर्व है। मित्रों, जबरदस्त तनाव और अघोषित युद्ध के माहौल में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा रैलियों आदि में भाग लेना देश को एक नई ऊर्जा दे रहा है और एक नई प्रेरणा दे रहा है कि आप जिस भी मिशन या कार्य में लगे हों, उसे शिद्दत से करते रहें। मां गंगा की आजादी से जुड़े महान कार्य जैसे बांधों, बंदरगाहों, बैराजों के ध्वस्तीकरण के बगैर मां गंगा का गंगतव नहीं अा सकता। ये सारे तथ्य, वैज्ञानिक सत्य के रूप में पहले से सभी की जानकारी में हैं। मगर सभी सरकारें केवल और केवल अराजकता फैलाने में लगी हैं और इस अराजकता का एक और उदाहरण देखिए कि CNG सी. एन.जी. जैसे कैंसर-कारी जहर को पूरे देश में एक साथ युद्ध स्तर पर लांच किया जा रहा है। खुद गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि पेट्रोल और डीजल से अधिक खतरनाक है – सीएनजी। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की सबसे बड़ी वैज्ञानिक संस्था सीएसआईआर ने 2015 में भी रिपोर्ट दी कि सीएनजी का अदृश्य धुआं, डीजल और पेट्रोल के धुंए से भी कहीं अधिक खतरनाक है और इसके कारण कैंसर भी हो सकता है। मां गंगा और सीएनजी से सम्बन्धित नीतियों से कैंसर फैलेगा मगर सरकार किसी भी ट्वीट, संदेश या रजिस्टर्ड डाक का कोई जवाब नहीं दे रही है। जबकि चीन और अमेरिका अपनी सभी व्यवस्था को सोलरीकृत करने में लगे हैं, हम अभी भी सीएनजी के माध्यम से कैंसर को बहुत तेजी से बढ़ाने में लगे हैं। हवा, पानी, आकाश में जहर होगा तो बुद्धि में अमृत तत्व कैसे आएगा ? जब तक अमृत तत्व नहीं है, तब तक कोई भी देश तन और मन से कैसे स्वस्थ रहेगा? मंदिर बनाने में तो तारीख पर तारीख का सवाल है, मगर देश की मां, मां गंगा की आजादी के लिए, मतलब कि व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान के लिए तो बस कैबिनेट का दस्तखत (हस्ताक्षर) ही तो चाहिए। मां गंगा अपना पानी मांग रही हैं, मां गंगा आजादी मांग रही हैं और इसलिए भी कि मां गंगा भारत का केन्द्र हैं और जब तक केन्द्र परेशान है, तब तक देश भी परेशान ही रहेगा। यह सारी बातें हम न जाने कितने लंबे समय से लिख रहे हैं मगर अपनी जिद्द पर अड़े लोग न तो नदी विज्ञानियों की सुनेंगे और न ही धर्म ग्रंथों का अध्ययन करेंगे और अपनी जिद्द के हिसाब से फर्जी तर्क गढ़ कर कोर्ट को भी गुमराह करके अपने मनमाफिक फैसले लेते रहेंगे। व्यक्ति से ऊपर पार्टी। पार्टी से ऊपर देश। बहुत अच्छी बात। मगर उद्योग और धंधे के चक्कर में पर्यावरण को कब तक जान बूझकर जहरीला करते रहोगे और कब तक देश का नागरिक बीमारियों से और कैंसर से तड़प-तड़प कर मरता रहेगा? कब तक? आखिर कब तक?
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