October 22, 2026

उन्नाव रेप पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उसके लिए प्रतिनियुक्त निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दिल्ली की एक अदालत का रुख किया- अजय मिश्रा

Spread the love

दिल्ली:

 

उन्नाव रेप पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उसके लिए प्रतिनियुक्त निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दिल्ली की एक अदालत का रुख किया है।

 

31 जुलाई को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से एक आवेदन दिया गया है कि जिसमें कहा गया है कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को निजी सुरक्षाधिकारी (पीएसओ) द्वारा परेशान किया गया जा रहा है। इस संदर्भ में कि वो लोग उन्हें उनके स्वतंत्रता का आनंद नहीं लेने दे रहे हैं.

 

न्यायाधीश ने सीबीआई के एक अधिकारी को स्थानीय पुलिस की मदद से इस संबंध में प्रभाव आकलन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस से एक सीलबंद लिफाफा भी मिला है, जिसमें रेप पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कुछ आरोप लगाए गए हैं। सत्र न्यायाधीश ने कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि इस आवेदन पर विचार किया जाए।”

 

गौरतलब है कि भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने 2017 में नाबालिग का अपहरण और रेप किया था। रेप पीड़िता ने 8 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मामले को उन्नाव से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था और केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच की गई थी।

 

इसे भी पढ़ें: उन्नाव में पुलिस की पिटाई से सब्जी विक्रेता की मौत, औवेसी ने यूपी सरकार पर साधा निशाना

 

★SC ने उन्नाव रेप पीड़िता को प्रदान की सुरक्षा

 

28 जुलाई, 2019 को ट्रक की टक्कर के बाद, पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना में पीड़िता के दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने धमकी का आरोप लगाते हुए पत्र लिखकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मदद की मांग थी। जिसके बाद एक अगस्त 2019 को, शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि पीड़िता और उसकी मां, परिवार के अन्य सदस्यों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए।

 

गौरतलब है कि 20 दिसंबर 2019 को रेप के मामले में कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. 4 मार्च, 2020 को, सेंगर, उनके भाई और पांच अन्य को रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत के लिए दोषी पाया गया और उन्हें 10 साल के कारावास की सजा सुनाई गई।