प्रयागराज
*इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी हुई कुछ खास खबरें..*
➡️ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि परिवार अदालत में विवाह पुनर्स्थापित करने संबंधी मुकदमे को तलाक के केस में तब्दील करने की संशोधन अर्जी मंजूर होने की तारीख से प्रभावी होगी। यह सही नहीं है कि संशोधन अर्जी मंजूर हुई तो मुकदमा दाखिल होने की तिथि से संशोधन माना जाएगा।
➡️ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता है। बालिग जोड़े को अपनी मर्जी से साथ रहने का संवैधानिक अधिकार है। उनके जीवन में किसी प्राधिकारी या व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने लिव इन में रह रहे याचियों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट रद कर दी है।
➡️ इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो न्यायमूर्तियों ने सोमवार को हाई कोर्ट परिसर के आसपास ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा तैयार योजना का जायजा लिया। परिसर के बाहर जाकर निरीक्षण किया और पाया कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है।
➡️ गुजरात के साबरमती जेल में बंद माफिया अतीक के खिलाफ आखिरकार एक और गवाही हो गई है। देवरिया जेल कांड में पीड़ित मो.जैद खालिद की गवाही होने से माफिया और उसके करीबियों पर शिकंजा कस गया है। पिछले दो महीने में छह बार तारीख लगी थी और सातवीं तारीख पर गवाही हुई है।
➡️ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर की कार्बन डेटिंग सहित वैज्ञानिक सर्वे कराए जाने की मांग में दाखिल याचिका पर (एएसआइ से पूछा है कि क्या बिना क्षति पहुंचाए कार्बन डेटिंग की जा सकती है। यह प्रश्न न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए किया।
➡️ इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बढ़े हुए फोटो आईडेंटीफिकेशन शुल्क को वापस ले लिया है। शुल्क अब पहले की तरह 70 रुपये ही लिया जाएगा। कार्यकारिणी ने अब अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता निधि की शुरूआत की है, सोमवार को इसका शुभारंभ हुआ।

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