प्रेस विज्ञप्ति
अनुराग शुक्ला राष्ट्रीय सम्पर्क प्रमुख जय भारत मंच ने कहा कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति यात्री है। कौन सी यात्रा का यात्री? *”मोक्ष की यात्रा का। इस यात्रा का लक्ष्य मोक्ष है।”* सबको वहीं जाना है। आज या कल वही पहुंचना है। *”लोग चाहे इस बात को आज समझें, या न समझें। चाहे मोक्ष शब्द से समझें, चाहे अन्य किसी शब्द से समझें। समझना तो होगा ही। क्योंकि मोक्ष प्राप्त किए बिना किसी का गुज़ारा नहीं है।”*
आप पूछेंगे, *”इसका क्या तात्पर्य है, कि मोक्ष प्राप्त किए बिना किसी का गुज़ारा नहीं है।”* इसका तात्पर्य यह है, कि *”प्रत्येक व्यक्ति सुख को ढूंढ रहा है। उसे 100 % सुख चाहिए, दुख बिल्कुल नहीं चाहिए। एक प्रतिशत भी नहीं चाहिए।”* परन्तु ये दोनों बातें संसार में तो कहीं संभव होती दिखती नहीं। *”जब संसार में हैं ही नहीं, तो दिखाई कैसे देंगी? नहीं दिखाई देंगी.”*
तो फिर ये दोनों बातें कहां पर होती हैं? उत्तर है — *”मोक्ष में। वहां ईश्वर के साथ संबंध हो जाने के कारण, ईश्वर का आनंद मिलता है, जो कि 100 % शुद्ध आनन्द है। और यह प्रकृति के सत्त्वगुण के सुख से, लाख गुना ऊंचे स्तर का भी होता है। वहां प्रकृति का संबंध पूरी तरह से आत्मा से कट जाने के कारण, दुख 100 % छूट जाता है। क्योंकि दुख आता ही प्रकृति के संबंध से है।”* इस प्रकार से मोक्ष में ही ये दोनों बातें पूरी होती हैं। इसीलिए हमने यह कहा कि *”बिना मोक्ष प्राप्त किए किसी का गुज़ारा नहीं है।”*
यदि लोग इस मोक्ष प्राप्ति वाली बात को आज नहीं समझ रहे, तो कोई बात नहीं। *”जब भी कोई व्यक्ति इस बात को समझेगा, तभी से वह मोक्ष के लिए प्रयत्न आरंभ कर देगा, और धीरे-धीरे पुरुषार्थ करते-करते एक दिन मोक्ष तक पहुंच ही जाएगा।”*
*”अब यह जो मोक्ष का मार्ग है, इस पर चलना भी कठिन है, और इसको समझना भी बहुत कठिन है।”* कोई बात नहीं। संसार के महापुरुष यही काम करते हैं। *”वे जनता की इस मोक्ष मार्ग की यात्रा को कम तो नहीं करते, लेकिन इस यात्रा को कैसे आसानी से पूरा करें, इसके उपाय अवश्य बताते हैं।” “जो भूतकाल में महापुरुष हो गए, जैसे महर्षि पतंजलि, महर्षि जैमिनी, महर्षि कणाद, महर्षि गौतम, अथवा महर्षि दयानंद जी आदि महापुरुष हो गए, उनके लिखे ग्रंथों को किसी योग्य विद्वान गुरु जी से पढ़ें। उनके आदेश निर्देश में चलें।” “और आज भी जो कोई जीवित शरीरधारी मनुष्यों में से भी वैदिक शास्त्रों के विद्वान, वेदानुकूल आचरण वाले ज्ञानी तपस्वी निष्कपट महात्मा जी मिलें, तो उनके भी आदेश निर्देश का पालन करें। उनके विरुद्ध आचरण न करें।”*
*”यदि आप इतना कर लेंगे, उनके आदेश निर्देश का पालन कर लेंगे, और अपनी मनमानी नहीं करेंगे, तो अवश्य ही आप सुखी रहेंगे, और इसी से आपका कल्याण होगा। आपकी मोक्ष प्राप्ति की यात्रा भी बड़ी सरल हो जाएगी।”*

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