April 23, 2026

*अखिलेश यादव सरकार ने 53 लोगों को दिया है मनमाने ढंग से यश भारती सम्मान*

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कृष्ण मोहन उर्फ बग्गा

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खनन घोटाले के बाद अखिलेश यादव सरकार में अब यश भारती पुरस्कार प्रदान करने पर प्रश्न उठ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया है कि अखिलेश सरकार ने 53 लोगों को मनमाने ढंग से यश भारती दी। नूतन ठाकुर ने सूचना के अधिकार के तहत संस्कृति विभाग से मिली सूचना के आधार पर यह आरोप लगाया है।

आरटीआइ की सूचना के हवाले से बताया कि 2016-17 के लिए यश भारती पुरस्कारों के संबंध में 20 अक्टूबर, 2016 को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में 54 नामों की संस्तुति की गई। उस समय की संस्कृति मंत्री अरुण कुमारी कोरी की संस्तुति से यह अखिलेश यादव को भेजी गई। अखिलेश यादव ने इसमें बिना कोई कारण बताए आगरा के जरदोजी कला के शमीमुद्दीन का नाम काट दिया तथा उसी प्रकार मनमर्जी से 23 नए नाम जोड़ दिए। इसमें चार नाम हाथ से बढ़ाए गए थे। फिर बिना किसी आधार या संस्तुति के 12 नाम बढ़ाए गए। इसमें शाबाद रुवैदी का नाम हाथ से बढ़ाया गया था।

इसके बाद फिर छह नए नाम, फिर तीन, फिर 29 नवंबर 2016 को आइएएस सुहास एलवाई समेत दो तथा 19 दिसंबर 2016 को सात नए नाम मनमाने ढंग से बढ़ाए गए। नाम बढ़ाये जाने का कोई कारण या आधार पत्रावली में नहीं है।राजनेताओं के अधिकारों के भारी दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। यश भारती पुरस्कार लेने वालों में 6 लोग ऐसे हैं जो किसी ना किसी समाजवादी नेता की सिफारिश पर पुरस्कार हासिल कर पाए हैं। अखिलेश सरकार में कद्दावर मंत्री रहे उनके चाचा शिवपाल यादव की सिफारिश पर दो लोगों को जबकि मंत्री आजम खान की सिफारिश पर एक व्यक्ति को यश भारती पुरस्कार से नवाजा गया है। बाहुबली विधायक और उस वक्त मंत्री रह चुक राजा भैया ने भी दो लोगों को पुरस्कार दिलाने में मदद की थी।

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