October 20, 2021

भाजपा सरकार चलाने में असमर्थ हैं ओमप्रकाश सिंह =================== गाजीपुर : देश में घटनायें इतना ज्यादा बढ़ी है कि इसकी कोई गिनती नहीं है। चाहे अपराध, महगाई, बेरोजगारी हो किसी पर अंकुस नहीं है। हमारे देश के नौजवानों को अपने ही देश में रोजगार नहीं मिल रहा तो घर , बीबी ,बच्चे, मा – बाप को छोड़कर दुसरे देश में रोजगार करने जा रहे हैं। ये बातें समाजवादी पार्टी के पूर्व कैबिनेट मंत्री व दिग्गज नेता ओमप्रकाश सिंह ने एक खास मुलाकात में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में जब संविधान की संरचना हुई तो उसमें सर्व धर्म को माना गया। सबको अपने धर्म के प्रति स्वतंत्रतता है और उनका विचार, व्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमारे संविधान के बड़े नेताओं ने बहुत गहन मंथन चिंतन करने के बाद भारत गणराज्य की स्थापना हुई। ये आरएसएस या भारतीय जनता पार्टी के लोगों का जंगे आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं है। यह अंग्रेजों के साथ थे इस लिए खुला परिषद था। श्री सिंह ने कहा कि कभी राम को किसी धर्म में नहीं बैठाना चाहिए। राम कण-कण में है राम जनजन में है और राम सभी के घरों में हैं, श्री राम ने कहा था कि ना मै मंदीर में न मस्जिद में न गिरजाघर में न गुरुद्वारे में ढूंढ लो कोई जहां राम मिलेगा। कांग्रेस एक धर्म की बात की तो पाकिस्तान अलग देश हो गया। जंग – ए आजादी की लड़ाई में लड़ने वाले इन लोगों से कम महत्वपूर्ण लोग नहीं थे। महात्मा गांधी, अब्दुल कलाम, अब्दुल आजाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल। अगर ये लोग इतना ही अच्छे थे तो पटेल ने सरकार बनने के बाद आरएसएस पर बैन क्यों लगाया। तब इन्होंने कहां की मेरी आरएसएस संगठन केवल प्रयोग सांस्कृतिक संस्था है। इससे भी सत्ता में बैठने वाले लोगों को ज्ञान होना चाहिए ना कि जिस पटेल की मूर्ति को बना रहे हैं उसी पटेल ने आरएसएस को बैन करने का काम इसी मुल्क में किया। इतना तो भारतीय जनता पार्टी को समझ होनी चाहिए। या तो इनको ज्ञान नहीं है या तो ज्ञान होने के साथ साथ अनहोना ज्ञानी बन रहे हो। यह मुल्क के सेहत के लिए ठीक नहीं है। इससे हमारा देश बटेगा, गलत दिशा में जाएगा। काशी में विश्वनाथ मंदिर है तो काशी में कबीर भी हैं। इसी काशी में रामचरितमानस के जीने की परंपरा है। तुलसीदासजी ने इसी तुलसी घाट पर रामचरितमानस की स्थापना की। यहीं पर करपात्री भी हैं जिन्होंने संत वचन देकर सबको भाईचारा, प्यार, मोहब्बत देने का काम किया। यहां आदि शंकराचार्य ने भी देश को एक करने का काम किया। उन्होंने कहा कि आज राम का कौन विरोध कर रहा है। यदि राम का विरोध होता तो मुगल वंश में भी रामलाीलाए होती थी राम चरित्र मानस सुना जाता था। इस देश में मौर्य वंश भी रहा है, गुप्त वंशी भी रहा है जो पांच सौ – छःसौ वर्ष राज किये है ये मामुली लोग नहीं थे। अच्छा काम करने वाले लोगों का लंबा इतिहास है उन्होंने कभी भी इस देश को अपने व राज साही के लिए देश को बांटने का काम नहीं किया बल्कि देश को सुदृढ़ रूप से बढ़ाने का काम किया है। अन्य लोगों का भी राज करने का यहा के इतिहास में लिखा है। उन इतिहासो से भारतीय जनता पार्टी को सबक सीखना चाहिए और में जिसमें बहुत धर्म को मानने वाले लोग हैं। चीन हो, जापान हो ,इंग्लैंड हो, थाईलैंड हो, श्रीलंका हो, भूटान हो या इसके आसपास के जितने भी देश हो। इस मुल्क के संतो के प्रति अद्भुत संबंध और जो बुद्ध धर्म हिंदुस्तान में नहीं फैला वह धर्म और धर्म गुरु का सम्मान दुनिया में और देश बड़े-बड़े शक्तिशाली देशों में फैला। हमारे सूफी संतों ने इसे भगवान् का रूप दिया गया। उन्होंने समाज को जोड़ने समाज को साथ चलने के साथ साथ ईमान पैदा करने का काम किया।

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गाजीपुर : देश में घटनायें इतना ज्यादा बढ़ी है कि इसकी कोई गिनती नहीं है। चाहे अपराध, महगाई, बेरोजगारी हो किसी पर अंकुस नहीं है। हमारे देश के नौजवानों को अपने ही देश में रोजगार नहीं मिल रहा तो घर , बीबी ,बच्चे, मा – बाप को छोड़कर दुसरे देश में रोजगार करने जा रहे हैं। ये बातें समाजवादी पार्टी के पूर्व कैबिनेट मंत्री व दिग्गज नेता ओमप्रकाश सिंह ने एक खास मुलाकात में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में जब संविधान की संरचना हुई तो उसमें सर्व धर्म को माना गया। सबको अपने धर्म के प्रति स्वतंत्रतता है और उनका विचार, व्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमारे संविधान के बड़े नेताओं ने बहुत गहन मंथन चिंतन करने के बाद भारत गणराज्य की स्थापना हुई। ये आरएसएस या भारतीय जनता पार्टी के लोगों का जंगे आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं है। यह अंग्रेजों के साथ थे इस लिए खुला परिषद था। श्री सिंह ने कहा कि कभी राम को किसी धर्म में नहीं बैठाना चाहिए। राम कण-कण में है राम जनजन में है और राम सभी के घरों में हैं, श्री राम ने कहा था कि ना मै मंदीर में न मस्जिद में न गिरजाघर में न गुरुद्वारे में ढूंढ लो कोई जहां राम मिलेगा। कांग्रेस एक धर्म की बात की तो पाकिस्तान अलग देश हो गया। जंग – ए आजादी की लड़ाई में लड़ने वाले इन लोगों से कम महत्वपूर्ण लोग नहीं थे। महात्मा गांधी, अब्दुल कलाम, अब्दुल आजाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल। अगर ये लोग इतना ही अच्छे थे तो पटेल ने सरकार बनने के बाद आरएसएस पर बैन क्यों लगाया। तब इन्होंने कहां की मेरी आरएसएस संगठन केवल प्रयोग सांस्कृतिक संस्था है। इससे भी सत्ता में बैठने वाले लोगों को ज्ञान होना चाहिए ना कि जिस पटेल की मूर्ति को बना रहे हैं उसी पटेल ने आरएसएस को बैन करने का काम इसी मुल्क में किया। इतना तो भारतीय जनता पार्टी को समझ होनी चाहिए। या तो इनको ज्ञान नहीं है या तो ज्ञान होने के साथ साथ अनहोना ज्ञानी बन रहे हो। यह मुल्क के सेहत के लिए ठीक नहीं है। इससे हमारा देश बटेगा, गलत दिशा में जाएगा। काशी में विश्वनाथ मंदिर है तो काशी में कबीर भी हैं। इसी काशी में रामचरितमानस के जीने की परंपरा है। तुलसीदासजी ने इसी तुलसी घाट पर रामचरितमानस की स्थापना की। यहीं पर करपात्री भी हैं जिन्होंने संत वचन देकर सबको भाईचारा, प्यार, मोहब्बत देने का काम किया। यहां आदि शंकराचार्य ने भी देश को एक करने का काम किया। उन्होंने कहा कि आज राम का कौन विरोध कर रहा है। यदि राम का विरोध होता तो मुगल वंश में भी रामलाीलाए होती थी राम चरित्र मानस सुना जाता था। इस देश में मौर्य वंश भी रहा है, गुप्त वंशी भी रहा है जो पांच सौ – छःसौ वर्ष राज किये है ये मामुली लोग नहीं थे। अच्छा काम करने वाले लोगों का लंबा इतिहास है उन्होंने कभी भी इस देश को अपने व राज साही के लिए देश को बांटने का काम नहीं किया बल्कि देश को सुदृढ़ रूप से बढ़ाने का काम किया है। अन्य लोगों का भी राज करने का यहा के इतिहास में लिखा है। उन इतिहासो से भारतीय जनता पार्टी को सबक सीखना चाहिए और में जिसमें बहुत धर्म को मानने वाले लोग हैं। चीन हो, जापान हो ,इंग्लैंड हो, थाईलैंड हो, श्रीलंका हो, भूटान हो या इसके आसपास के जितने भी देश हो। इस मुल्क के संतो के प्रति अद्भुत संबंध और जो बुद्ध धर्म हिंदुस्तान में नहीं फैला वह धर्म और धर्म गुरु का सम्मान दुनिया में और देश बड़े-बड़े शक्तिशाली देशों में फैला। हमारे सूफी संतों ने इसे भगवान् का रूप दिया गया। उन्होंने समाज को जोड़ने समाज को साथ चलने के साथ साथ ईमान पैदा करने का काम किया।