January 21, 2022

प्रवासी भारतीय दिवस: अभिभूत हैं अपनी धरती पर आकर भारतवंशी

Spread the love

प्रवासी भारतीय दिवस: अभिभूत हैं अपनी धरती पर आकर भारतवंशी।


वाराणसी। दुनिया के कोने कोने से प्रवासी भारतीय दिवस के लिए काशी नगरी पहुंचे भारत वंशी आह्लादित और अभिभूत दिखे। बहुत से विदेशी मेहमान इस वजह से दुगुना खुश दिखे कि इस विश्व स्तरीय आयोजन में हिस्सा लेने के कारण ही वह पहली बार भारत आये और इसके साथ ही उन्हें दुनिया की प्राचीनतम नगरी काशी की धरती पर विचरण करने और बाबा भोलेनाथ के दर्शन का भी अवसर मिल गया। त्रिनिदाद टोबैगो तथा दक्षिणी हिन्द महासागर के द्वीपीय देशों से 40 सदस्यीय एक दल के साथ भारत आये शिवनारायण राम गुलाम , फिजी से आये मोहम्मद अख़्तर और उनके अधिकतर साथी पहली बार भारत आये हैं उनमे से कइयों को अपने वंशजों के मूल स्थानों का कुछ पता नही बस केवल इतना मालूम है कि वह भारत से चलकर अफ्रीकी देशों में गए थे। प्रवासी भारतीय दिवस की बेहतरीन व्यवस्था और चाक चौबंद बंदोबस्त देखकर उन्हें बहुत ही अच्छा लगा। सम्मेलन के पहले दिन आज युवा प्रवासियों के रोल पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें जहां उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे नॉर्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी, न्यूजीलैंड के सांसद कंवलजीत सिंह बख्शी और अन्य अतिथियों ने विचार रखे। वहीं बाद में प्लेनरी सत्र में विदेश राज्यमंत्री जनरल वी के सिंह, और केंद्रीय मंत्री कर्नल राठौर ने युवाओं के प्रश्नो के उत्तर दिए और उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।
छह पीढ़ी पूर्व तंज़ानिया चले गए अपने पुरखों की जड़ों को तलाशती भारत पहुंची श्रीमती शमीम ख़ान ने भी प्रवासी भारतीय दिवस के उत्तम प्रबंध, भारत सरकार की मेहमान नवाज़ी और बनारस के खुले दिल के लोगों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। श्रीमती ख़ान के पुरखे कोंकण महाराष्ट्र से अफ्रीका गए थे जहां अब उनके परिवार के लोग सरकार के प्रतिष्ठित पदों पर हैं । वहीं खुद श्रीमती खान चार बार तंज़ानिया की सांसद और दो बार उप मंत्री रह चुकी हैं। मॉरीशस, साउथ अफ्रीका, इंडोनेशिया, मलेशिया, सामोआ, घाना, इरिट्रिया और ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड आदि देशों से पहुंचे भारतीय मूल के लोग वाराणसी की धरती पर आपस मे एक दूसरे से यूँ मिलते दिखे जैसे घर का कोई बिछड़ा काफी दिनों बाद घर आया हो।
वहीं टेंट सिटी की रंगत अलग ही छटा बिखेर रही है। अलग अलग वेश भूषा, पहनावे और रीति रिवाजों के लोग तीन दिनों के इस अस्थायी शहर को गुलज़ार बनाये हुए हैं। और यूँ लग रहा है जैसे भारत से दूर रहने वालों इन लोगों में भारतीयता के प्रति अगाध प्रेम और श्रद्धा उमड़ी पड़ रही है। ओमान में रहने वाले केरल मूल के भारतवासी डॉ पाल एम जे ने बताया कि वह अपनई पत्नी के साथ प्रवासी दिवस में आये हैं और बनारस के कई स्मारकों को देखने की उनकी सालों पुरा नी लालसा पूरी हो रही है।

º≠