May 25, 2022

पूरे देश में बढ़ सकता है बिजली संकट, झारखंड में बिजली क्राइसिस को सीएम ने अपने हाथों में लिया-

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*पूरे देश में बढ़ सकता है बिजली संकट, झारखंड में बिजली क्राइसिस को सीएम ने अपने हाथों में लिया*

 

*कोयले की कमी को लेकर केंद्र सरकार की तीन मिनिस्ट्री कोयला, बिजली और रेलवे आयी हरकत में*

 

*सेंट्रल इलेक्ट्रसिटी अथॉरिटी की ताजा कोल स्टॉक रिपोर्ट बहुत ही चिंताजनक, कोयला मंत्री ने कोयला उत्पादन बढ़ाने को लेकर किए प्रयास तेज*

 

रांची: सेंट्रल इलेक्ट्रि‍सिटी अथॉरिटी के ताजा डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट को मानें तो देश के बड़े पावर प्लांटो के पास केवल 26 प्रतिशत ही कोयले का स्टॉक बचा है. ऐसे में आने वाले दिनों में पूरे देश में बिजली संकट बढ़ सकता है. कोयला संकट को लेकर केंद्र सरकार के तीन मंत्रालय कोयला, रेलवे और बिजली मंत्रालय हरकत में आ गया है. केंद्रीय कोयला मंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है. कोयला मंत्री प्रहल्लाद जोशी ने ट्वीट करके कहा कि भारत में कोयला कंपनी, वाशरीज, टीटीपीएस और अन्य यूटिलिटीज के पास कोयला का पर्याप्त भंडारण है. हम न कोयला उत्पादन को बढ़ा रहे हैं बल्कि कोयला निकासी में सुधार के लिए रेलवे और बिजली मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. केंद्रीय विद्युत मंत्री ने बयान जारी कर कहा है कि उत्पादन कंपनियां ने अपने स्तर पर रेक का अरेंजमेंट कर लें.

*बिजली अफसरों से कर रहे हैं लगातार बातचीत, डीवीसी चेयरमैन सीएम से मिले*

बिजली संकट के बीच राज्य में अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने की कमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद ही संभाल ली है. वह लगातार बिजली के मुद्दे पर अधिकारियों से बात कर रहे हैं. बुधवार को डीवीसी के चेयरमैन रामनरेश सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. सीएम ने डीवीसी से अतिरिक्त 150 मेगावाट बिजली की मांग की है. डीवीसी द्वारा इसके लिए पीपीए करने की बात भी कही गयी है. सीएम ने कहा है कि जितनी जल्दी हो सके डीवीसी बिजली की व्यवस्था करें. सरकार नियमित रूप से डीवीसी को भुगतान करेगी. डीवीसी चेयरमैन ने शीघ्र ही अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने की बात कही है.

ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अविनाश कुमार ने बताया कि डीवीसी फिलहाल 50 मेगावाट अतिरिक्त बिजली आज से देने लगेगा. बाकी बिजली की व्यवस्था करने का निर्देश भी सीएम की ओर से दिया गया है.

*क्या है सेंट्रल इलेक्ट्रि‍सिटी अथॉरिटी की कोल स्टॉक रिपोर्ट*

सेंट्रल इलेक्ट्रि‍सिटी अथॉरिटी के ताजा डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट के अनुसार देश के 165 बड़े थर्मल पावर से 24 थर्मल पावर प्लांट के पास 0 से पांच फीसदी ही कोयले को स्टॉक बचा है. वहीं 30 थर्मल पावर प्लांट के पास 6 से 10 फीसदी तक कोयले का स्टॉक बचा है. देश के 165 बड़े थर्मल पावर प्लांट में से 54 यानि की 32.72 फीसदी के पास 10 फीसदी से भी कम कोयले का स्टॉक बचा है. 19 अप्रैल की बात करें तो 48 बड़े थर्मल पावर प्लांट के पास 10 फीसदी से उससे से कम कोयले का स्टॉक बचा था. यानि कि देश के बड़े पावर प्लांटों के पास मात्र 26 फीसदी ही कोयले का स्टॉक बचा है.

*झारखंड में 500 मेगावाट का गेप चल रहा है*

टाटा के पास 6 हजार 300 मेगावाट तक का गेप है. लेकिन स्टेट के रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा और बढ़ जाता है. यूपी में की बात की जाए 23 हजार मेगावाट बिजली की मांग पहुंच गयी है. करीब 3 हजार मेगावाट का गेप केवल यूपी में है.अगर झारखंड की बात करें तो कम से कम 500 मेगावाट का गेप चल रहा है.

*इंपोर्ट कोयला महंगा होने के कारण आना हुआ बंद*

देश में कोयला संकट यूं नहीं आया है. कोयले की कमी और बिजली संकट का एक बड़ा कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कोयला बहुत मंहगा होना भी है. आस्ट्रेलिया और दूसरे देशों से आयात होने वाले कोयले में भारी कमी हो गयी है. समस्या कोयले की सप्लाई के लिए रेलवे के रेक की उपलब्धता को लेकर भी है.