April 30, 2026

ईडी ने आईएएस पूजा सिंघल की हाईकोर्ट में खोली कुंडली,मनरेगा घोटाले का पैसा शेल कंपनियों में लगा-

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ईडी ने आईएएस पूजा सिंघल की हाईकोर्ट में खोली कुंडली,मनरेगा घोटाले का पैसा शेल कंपनियों में लगा

 

रांची।खूंटी में वर्ष 2010 में हुए मनरेगा घोटाले की करोड़ों की राशि तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल को मिली थीं। ये राशि बड़े अधिकारियों और सत्ता में बैठे शीर्ष लोगों तक पहुंचायी जाती थी। घोटाले की राशि से शेल कंपनियां चलाकर मनी लॉड्रिंग की गयी है। मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने यह जानकारी झारखंड हाईकोर्ट को दी।

 

सीएम के करीबियों के शेल कंपनी चलाने और सीएम को खनन लीज आवंटन करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ईडी ने यह जानकारी दी। इस पर चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने सरकार को मनरेगा घोटाले में दर्ज की गयी सभी 16 प्राथमिकी संपूर्ण ब्योरा के साथ पेश करने का निर्देश दिया।

 

ईडी की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान एक व्यक्ति ने मनी लांड्रिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही शेल कंपनियों की सूची भी दी है, जिस पर जांच जारी है। ईडी को जांच के दौरान कई दस्तावेज मिले हैं और ईडी की जांच अभी जारी है। खूंटी में हुए मनरेगा घोटाले की एक मामले की जांच की गयी थी। इस जांच में मनी लांड्रिंग के सबूत मिले हैं। इस आधार अभी भी कार्रवाई जारी है।

 

सरकार की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित है। इस पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। याचिका में जो आरोप लगाए गए हैं उसका कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया है। इस पर अदालत ने कहा कि सरकार इस याचिका का विरोध क्यों कर रही है।

 

ये मामला उजागर हो चुका है और हर किसी को पता है कि खनन सचिव के पास से करोड़ों रुपए बरामद हुए हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यह याचिका एक साल पहले दायर हुई थी जबकि ईडी की कार्रवाई एक सप्ताह से जारी है। ईडी की कार्रवाई के बाद सरकार ने उचित निर्णय लिया है। याचिकाकर्ता का क्रेडेंशियल सही नहीं है। उनके परिजन दो दशकों से सीएम हेमंत सोरेन के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। इस मामले में सरकार को टारगेट किया जा रहा है। इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है इसे खारिज किया जाना चाहिए।

 

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि इस मामले में खनन सचिव पकड़ी गई हैं और निलंबित हुई हैं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। क्या कोर्ट ने इस तरह के एफआईआर करने पर कोई रोक लगाई है। सचिव इस मामले में संदिग्ध हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि जब इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है तो किस आधार पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।