पुलिस की कर्तव्य परायणता का ही नतीजा..!
सुधार के नाम पर अभी तक जो हुआ,ऊंट के मुंह में जीरे के समान..!
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देश में पुलिस प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था सदैव एक चुनौती रही है! पर पुलिस जवानों की परेशानियों को भी नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए! कोरोना महामारी से निपटना रहा हो या कोई तीज त्योहार या अन्य आपदा पुलिस विभाग की इससे निपटने और व्यवस्था को बनाए रखने में अहम भूमिका रही है! उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ हो या फिर थानों में बाहुबलियों का आत्मसमर्पण पुलिस की कर्तव्य परायणता का ही नतीजा है!पर चाहे कमिश्नरेट हो जिला मुख्यालय या थाना हो जवानों को आवास और दैनिक क्रिया हेतु अव्यवस्था का ही शिकार होना पड़ता है!अगर व रात में अपना कर्त्तव्य निभाने के बाद अच्छी नींद नहीं ले पाएंगे तो स्वाभाविक है कि परिणाम उसके बदले हुए व्यवहार में दिखाई देगा! पुलिस सुधार से संबंधित समितियों की सिफारिशों को सरकार और राज्यों द्वारा जनहित और जवानों के हित में लागू किया जाना चाहिए!ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि इन समस्याओं से सरकार ने मुंह मोड़ रखा है!पर जो कुछ सुधार के नाम पर अभी तक हुआ है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही है!पुलिस विभाग को आधुनिक तकनीक से लैस करना है तो उसकी समस्याओं को भी ध्यान में रखने से वांछित परिणाम मिलेगा।
🙏🙏💥💥समीर (विक्की)





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