चुनाव के पूर्व सपा सरकार बनने पर जिले के अधिकारियों को देख लेने की धमकी देने वाले सुभासपा के मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर लटक रही तलवार को लेकर अब कोर्ट का फैसला नए सिरे से आया है। हेट स्पीच के मामले में हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बताते चलें कि अब्बास के पिता मुख्तार अंसारी पर दोबारा गैंगस्टर की कार्रवाई शुरू की गई है।
इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विधानसभा चुनाव के दौरान आपत्ति जनक बयान देने के आरोप में मऊ नगर कोतवाली में दर्ज एफआआर के तहत बाहुबली मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है। इस बाबत यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति वी के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अब्बास अंसारी की याचिका पर दिया है। प्रकरण में याचिका पर अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने बहस की। याची का कहना है कि तीन मार्च की चुनावी सभा में सत्ता में आने पर अधिकारियों को सबक सिखाने की धमकी दी, जिसकी एफआइआर चार मार्च को दर्ज कराई गई है।
इस बाबत याची का कहना है कि आरोपों पर सात साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती और संज्ञेय अपराध की धारा जानबूझकर जोड़ी गई है। इस बाबत कहा गया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एफआइआर दर्ज कराई गई है किन्तु यह सही नहीं है। वहीं इस धारा में पुलिस याची को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है जबकि वह मऊ से विधायक है,उसे शपथ लेने नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते में याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। प्रकरण में अब अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने इस बाबत याची को विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि यदि सहयोग नहीं करते तो सरकार अंतरिम आदेश विखंडित करने की अर्जी दाखिल कर सकती हैं।





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