*कर्मचारियों के लिए गलत है तो वही चीज नेताओं के लिए सही कैसे..??*
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हमारे देश की राजनीति में कुछ सवाल अब भी अनुत्तरित हैं!
जिनका जवाब जनता जानना चाहती है!
जब नेता ही सरकार के अंग बनते हैं और व ही जनता के लिए विधि निर्माण का कार्य भी करते हैं तो सरकारी कर्मचारियों और नेताओं में विभेद क्यों किया जाता है?
अगर एक चीज कर्मचारियों के लिए गलत है तो वही चीज नेताओं के लिए सही कैसे हो सकती है जबकि वही बाद में सरकार के अंग बनते हैं!
जब किसी सामान्य नागरिक के ऊपर कोई मुकदमा दर्ज हो तो वह सरकारी कर्मचारी नहीं बन सकता तो दूसरी ओर नेताजी ढेरों मुकदमे ढोकर भी माननीय कैसे बन जाते हैं?
जब सरकारी कर्मचारी आजीवन देश की सेवा करके भी पुरानी पेंशन नहीं प्राप्त कर सकते तो दस बारह महीने या पांच साल के लिए माननीय विधायक सांसद मंत्री बन जाने पर भी नेताजी कैसे पेंशन प्राप्तकर लेते हैं?
इसी तरह जब एक सामान्य नागरिक की दो या दो से अधिक पत्नियां होने पर वह सरकारी कर्मचारी नहीं बन सकता!
तो नेताजी विधायक सांसद मंत्री तक कैसे बन जाते हैं?
उम्मीद है कि यह सब सवाल भी देश का आम मतदाता अपने कर्णधारों से करेगा।
*🙏🏻🙏🏻💥💥समीर कुमार (विक्की)*





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