उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से दो महीने से गायब नाबालिग लड़की का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज उत्तर प्रदेश पुलिस फटकार लगी और मामले की जांच दिल्ली पुलिस को सौंप दी।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को लगाई फटकार लगाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से जांच का रिकॉर्ड दिल्ली की मालवीयनगर पुलिस को कल तक सौंपने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर को जांच की निगरानी करने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने सुनाया फैसला।
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के वकील ने कहा कि राज्य पुलिस सख्त कदम उठा रही है और अंतर-राज्यीय प्रभाव के कारण जांच की गति प्रभावित हुई है। गोरखपुर की 13 साल की लापता लड़की की मां ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। याचिका में दिल्ली के एक निवासी पर गोरखपुर की नाबालिग लड़की का अपरहरण करने का शक जताया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि जुलाई में जब याचिकाकर्ता अपनी बेटियों के साथ गोरखपुर में अपने पति के परिवार के साथ थी, तभी सबसे बड़ी बेटी लापता हो गई। याचिका के अनुसार, छोटी बेटी ने संदिग्ध और उसकी बहन के बीच कुछ फोन पर बातचीत सुनी, जहां संदिग्ध उसे धमकी दे रहा था कि अगर वह दिल्ली में अपने फ्लैट में नहीं आई तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बातचीत के तुरंत बाद लड़की लापता हो गई।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मामले में गोरखपुर पुलिस के समक्ष शिकायत की गई, लेकिन उन्होंने कोई त्वरित कदम नहीं उठाया। याचिका में आशंका जताई गई कि लड़की का यौन शोषण किया जा सकता है या देह व्यापार में धकेला जा सकता है। याचिकाकर्ता दिल्ली में एक घरेलू नौकरानी के रूप में काम करती है और संदिग्ध लंबे समय से उसकी नाबालिग बेटी को बहकाने की कोशिश कर रहा था। इस संबंध में उसने दिल्ली के मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।





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