May 7, 2026

कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश-अजय मिश्रा

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*भाग-01*

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*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*

 

● कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट की हमारी नीति बेहद कारगर रही है। स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, प्रशासन से जुड़े अधिकारी/कर्मचारी सहित समाज के सभी वर्गों ने कोविड की रोकथाम में सहयोग किया है।इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में कोविड टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 0.8% रह गई है, जबकि रिकवरी दर 96.10 हो गया है।

 

● विगत 24 घंटों में संक्रमण के 2,287 नए केस आए हैं, जबकि इसी अवधि में डिस्चार्ज होने वालों की संख्या 7902 है। वर्तमान में कुल कोरोना मरीजों की संख्या 46,201 है। इनमें से 26,187 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं। 16 लाख 21 हजार 743 प्रदेशवासियों ने अब तक कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर आरोग्यता प्राप्त की है।

 

● बीते 24 घंटों में 3,30,289 सैम्पल की टेस्टिंग की गई है, इसमें 1,54,000 टेस्ट आरटीपीसीआर माध्यम से किए गए हैं। इस तरह अब तक उत्तर प्रदेश में 04 करोड़ 87 लाख 56 हजार 628 कोविड सैम्पल टेस्ट किए गए हैं। इतनी टेस्टिंग करने वाला उत्तर प्रदेश अकेला राज्य है।

 

● टीकाकरण, कोविड से बचाव का सुरक्षा कवर है। केंद्र और प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को यह सुरक्षा कवर यथाशीघ्र प्रदान करने के लिए नियोजित प्रयास कर रही है। टीकाकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अब तक 34 लाख 24 हजार 355 लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज प्राप्त कर ली है। जबकि 01 करोड़ 42 लाख 43 हजार 355 लोगों ने टीके का पहला डोज प्रॉप्त कर लिया है। इस तरह, कुल 01 करोड़ 76 लाख 67 हजार 710 लोगों को वैक्सीन का कवर मिल चुका है। 18 से 44 आयु वर्ग के 18 लाख 22 हजार 374 लोगों ने अब तक टीका कवर प्राप्त कर लिया है।

 

● उत्तर प्रदेश में एक जून से टीकाकरण का नया चरण प्रारंभ हो रहा है। हमारा लक्ष्य जून माह में एक करोड़ लोगों को टीका-कवर से आच्छादित करने का है। एक जून से सभी 75 जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग का टीकाकरण किया जाएगा। 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों/न्यायिक सेवा/शिक्षकों/राज्य कर्मचारियों/बैंक कर्मियों/मीडिया प्रतिनिधियों के लिए विशेष बूथ बनाये जा रहे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष हमारे पास पर्याप्त वैक्सीन की उपलब्धता है। राज्य सरकार, वैक्सीन निर्माता कम्पनियों से सतत संपर्क में रहे।

 

– आपदाकाल में सभी प्रदेशवासियों के भरण-पोषण के लिए केंद्र व राज्य सरकार संकल्पित भाव के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से मई और जून माह में निःशुल्क राशन वितरण किया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार द्वारा जून, जुलाई और अगस्त माह में निःशुल्क राशन वितरण किया जाएगा। सभी संबंधित दुकानों पर एक-एक नोडल अधिकारी तैनात किए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी घटतौली न हो। सभी पात्र परिवारों को राशन सुविधाजनक ढंग से प्राप्त हो। इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग का आग्रह किया जाए।

 

● बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन का कार्य तेजी से पूरा किया जाए। यह सुनिश्चित करें कि इनके वेतन का भुगतान समय से हो।

 

● कोरोना आपदाकाल में कतिपय निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। जांच कराई गई तो पता चला कि शासन द्वारा तय दरों की अवहेलना कर कच्ची रसीद पर अधिक भुगतान लिया गया है। आपदाकाल में इनकी यह कार्यशैली समाज के विरुद्ध है। तमाम शिकायतें प्राप्त हुईं हैं, ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

 

● निराश्रित गौ आश्रय स्थलों में भूसा-चारा के पर्याप्त प्रबंध रखे जाएं। 300 से अधिक गौ वंश वाले गौ आश्रय स्थलों में कृषि अपशिष्ट और गोबर से ऊर्जा उत्पादन के नवीन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। भारत सरकार से भी इस संबंध में आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जा सकता है।

 

● ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज के संबंध में सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। संक्रमित मरीजों के उपचार में उपयोगी माने जा रहे एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन के अतिरिक्त विशेषज्ञों ने दो टैबलेट को भी कारगर पाया है। चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श करते हुए इन टैबलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, कानपुर, प्रयागराज सहित जहां कहीं भी ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज हो रहा है, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग यहां के सभी अस्पतालों के सतत सम्पर्क में रहें, कहीं भी उपयोगी दवाओं का अभाव न हो।

 

● प्रदेश के सभी जनपदों की सीएचसी और पीएचसी में उपकरणों की मरम्मत, क्रियाशीलता, परिसर की रंगाई-पुताई, स्वच्छता और मैन पावर की पर्याप्त उपलब्धता के संबंध में इस संबंध विशेष कार्यवाही तेज की जाए।

 

● लगातार प्रयासों से ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति में संतुलन की स्थिति बन गई है। तेजी से सामान्य होती स्थितियों के बीच कोविड की पीक स्थिति के सापेक्ष अब महज 30 फीसदी मांग ही है।विगत 24 घंटे में 513 एमटी ऑक्सीजन वितरित की गई, इसमें 312 एमटी रीफिलर को उपलब्ध कराई गई। ऑक्सीजन उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए औद्योगिक इकाइयों को उनके उपयोग के लिए ऑक्सीजन उपयोग की अनुमति दो गई है। औद्योगिक गतिविधियां सामान्य रूप से क्रियाशील रखी जाएं।

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*भाग-02*

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*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*

 

● सीएम हेल्पलाइन और आइसीसीसी के माध्यम से कोरोना मरीजों/परिजनों से संवाद बना कर उनकी जरूरतों की पूर्ति कराई जा रही है। अब इसी प्रकार पोस्ट कोविड मरीजों और ब्लैक फंगस की समस्या से ग्रस्त मरीजों/परिजनों से हर दिन संवाद किया जाए। उनकी सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। मरीजों अथवा उनके परिजनों से संवाद करते समय संवेदनशील व्यवहार का होना आवश्यक है।

 

● भविष्य की आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना अभियान स्वरूप में की जा रही है। अब तक विभिन्न जिलों में 400 से अधिक ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किये गए हैं। इनके स्थापना कार्य की रीयल टाइम मॉनीटरिंग की जाए। जिला प्रशासन इन प्लांट्स के स्थापना कार्य की सतत मॉनीटरिंग करे। रॉ मैटेरियल की उपलब्धता हो अथवा सिविल वर्क समय से पूरे किए जाएं। उत्तर प्रदेश ऑक्सीजन उत्पादन के पैमाने पर आत्मनिर्भर होगा।

 

● प्रदेश में कुल 26,187 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं। इन मरीजों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाए। इनसे लगातार संवाद बनाए रखा जाए। इनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था को और बेहतर किया जाए। निगरानी समितियों के माध्यम से होम आइसोलेशन के मरीजों और जरूरत के अनुसार उनके परिजनों को मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाए। मेडिकल किट वितरण व्यवस्था की सतत मॉनीटरिंग की जाए।

 

● सभी जनपदों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को फूड पैकेट उपलब्ध कराया जाए। कंटेनमेंट ज़ोन में डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था को सुदृढ़ रखा जाए, जिससे आम जनता को आवश्यक सामग्री की सुचारु आपूर्ति होती रहे।

 

● विशेषज्ञों के आकलन के दृष्टिगत कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के संबंध में प्रो-एक्टिव नीति अपनाई जा रही है। सभी मेडिकल कॉलेजों में पीआईसीयू और एनआईसीयू की स्थापना को तेजी से पूरा किया जाए। यह कार्य शीर्ष प्राथमिकता के साथ किया जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री के स्तर से इसकी दैनिक मॉनीटरिंग कराई जाए।

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