माँ तुम बहुत बहादुर थी,इतना बीमार होने के बाद भी एक बार न बताया कि मैं बीमार हूँ,बीमारी में भी इधर उधर की बात करती रही बातचीत के दौरान ही मुझे एहसास हुआ कि आप तो बीमार है, मैं तीन घण्टे के बाद सभी ज़रूरी दवाओं के साथ तुम्हारे पास था,लेकिन मर्ज काफ़ी बढ़ चुका था,मैं लाचार था,जान रहा था कि आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है लेकिन लाचारी के आगे कुछ नही कर सका आपने कोरोना जैसी बीमारी से बड़ी आसानी से बिना दवा के जंग जीत ली लेकिन इसके बाद शुरू हुआ इलाज़ आपको बचा न सका ……29 अप्रैल को राजनीतिक हस्तक्षेप से आपको प्रदेश व देश की सबसे बड़ी मेडिकल यूनिवर्सिटी किंग जार्ज यूनिवर्सिटी में दाखिला तो मिल गया, इलाज भी शुरू हो गया लेकिन आपके बढ़ते हुए मर्ज में कोई राहत नही मिली 11 दिन मेडिकल कालेज के गांधी वार्ड में बहादुरी से बिताए मैं आश्वस्त हो चुका था कि जहाँ हर एक घण्टे में हर किसी का कोई अपना साथ छोड़ रहा था…वहां आप बहादुरी से तीन दिन तक बिना कुछ खाये पिए काट चुकी थी,चौथे दिन खाने के रूप में दलिया व डॉक्टरों की सलाह पर जूस दिया जाने लगा था…..धीरे धीरे आक्सीजन स्तर को घटाया भी जा रहा था लगातार ब्रेन सर्किट के जरिये ऑक्सीजन हाई फ्लो पर दी जा रही थी,आक्सीजन लेवल भी मेनटेन हो रहा था लेकिन घटाए गए ऑक्सीजन लेवल को बीच बीच में बढ़ाना भी पड़ता था, क्योंकि फेफड़े आपके काम नही कर रहे थे चेस्ट में इंफेक्शन ज्यादा होने के कारण लंग अपनी स्वतत प्रक्रिया के तहत ऑक्सीजन नही ले पा रहे थे आपको लागातार हाई प्रेशर के साथ ऑक्सीजन दी जा रही थी मैं ये जान रहा था जंग इतनी आसान नही है लेकिन ये उम्मीद थी कि मेडिकल साइंस की तकनीकी के उपयोग व ईश्वर के भरोसे जंग जीती जा सकती है…..डॉक्टरों की सलाह पर अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू हुई …..डॉक्टर का कहना था यह पूर्णतः कोविड वार्ड है अब सबकुछ ठीक है दूसरी जगह इंफेक्शन से बचने के लिए शिफ़्ट करना ठीक रहेगा….मैं भी निश्चिन्त था कि ठीक है जो डाक्टर अभी तक ये कह रहे थे वो अभी क्रिटिकल है अब वो ठीक होने की बात कह रहे है तो आगे ठीक ही होगा …..क्योंकि इन ग्यारह दिनों में मुझे ये एहसास हो गया था कि जिस वार्ड में एक दिन भी लोग नही रह पा रहे थे वहाँ माता जी ने 11 दिन बिताए है और मुझे उम्मीद थी कि आगे भी सब कुछ ठीक ही होगा…..इसी बीच आशीष भाई की माता जी भी एडमिट हो चुकी थी मुझे आशीष वार्ड के बाहर मिल गए …..मैं उनके साथ माता जी को देखने गया वो बिल्कुल ठीक थी मुझे ऐसा लग रहा था …..लेकिन दो दिन बाद मनहूश खबर आई और वो हम सबको छोड़कर अनन्त में जा पहुँची…आशीष ने कुछ सवाल वहां की व्यवस्थाओं पर उठाए है जिसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है ……..इस दौरान एक और बुरी खबर आई विनोद भाई का फोन आया और उन्होंने बताया कि माता जी का स्वास्थ्य बहुत खराब है ऑक्सीजन लेवल लगातार ड्रॉप हो रहा है …..मैंने उनसे तुरंत पूछा क्या आपके पास सिलेण्डर है उन्होंने कहा नही, मेरे पास एक ऑक्सीजन स्प्रे रखा हुआ था मैं तत्काल ला प्लास उनके आवास पहुंचा और उनको वो स्प्रे दिया लेकिन बीमारी बड़ी हो चुकी थी ,इसलिए वो आक्सीजन स्प्रे काम नही किया उनको तत्काल हॉस्पिटल की जरूररत थी खैर कुछ ही देर बाद खबर आई कि उनको भी के जी एम यू में बेड मिल गया है वो आ रहे है मेरी माता जी का तब तक सब कुछ ठीक चल रहा था गाँधी वार्ड में ही एडमिट थी….इसलिए मैं भी विनोद भाई के पास पहुंच गया…..माता जी की इच्छाशक्ति गजब की थी जो हर माँ की होती है हर माँ अपने बेटे से अपने कष्ट छुपा लेती है ……विनोद जी ने अपनी माँ से अपनी भाषा मे गाड़ी रोकते ही बोले माईं उनका जवाब था हाँ ठीक हूँ…… खैर गाड़ी से उतारकर उनको एडमिट कराया गया सबकुछ नार्मल था ….विनोद भाई आश्वस्त थे कि अब हॉस्पिटल में आ गए है सब ठीक हो जाएगा मैं भी उनको ढांढस बंधा रहा था और अपने कुछ पिछले दिनों के अनुभव से अवगत करा रहा था,इसी बीच गांधी वार्ड में डाक्टर के राउंड के बाद ये तय हो चुका था कि बेड नम्बर 18 की पेशेन्ट को शिफ्ट किया जाना है, शाम को जूनियर डॉक्टर द्वारा मुझे बताया गया कि आपको दूसरे वार्ड ट्रामा सेन्टर में जाना है तैयारी हो रही थी …..मैं इस दौरान प्राईवेट हॉस्पिटल मेदांता के लिए भी प्रयास कर रहा था लेकिन 9 तारीख तक सफलता हासिल नही हुई थी बैरहाल सरकारी अव्यवस्थाओ के बीच शिफ्टिंग चालू हुई एम्बुलेंस के नाम एक छोटी सी आउटडेटेड ओमनी गाड़ी थी ,आक्सीजन सिलेंडर जो सही ढंग से कार्य नही कर रहा था…..वार्ड ब्वाय जिसको तमीज़ नही थी…बैरहाल पूरा जोर शिफ्टिंग को लेकर था इसलिये ये कमियां नजरअंदाज कर दी गई वैसे सरकारी व्यवस्था इसी तरह होती है इसलिए ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं था इस बीच शिफ्टिंग हो गई ट्रामा सेंटर के टी वी यू वार्ड में …शिफ्ट होते ही बताया गया कि ऑक्सीजन लेवल मेंनटेन नही हो पा रहा है इसलिए पेशेन्ट को इंटोवेट करना पड़ेगा यानी स्वास नली डालनी पड़ेगी कोई चारा नही बचा इसलिए न चाहते हुए भी मौन सहमति देनी पड़ी….बैरहाल इंटोवेट करने के थोड़ी देर बाद सबकुछ नार्मल हो गया ऑक्सीजन लेवल भी मेनटेन हो गया….इसी दौरान शशांक भैया का रात में एक बजे फोन आया कि मेदान्ता बात हो गई है, भैया कल सुबह आप शिफ्ट करा दीजिये मैने कहा भैया आप थोड़ा पहले बताते तो ठीक रहता अब तो वो वेन्टीलेटर पर है अब शिफ्ट करने में कठिनाई होगी इसलिए शिफ़्ट नही किया जा सकता क्योंकि कुछ ही देर पहले शिफ्टिंग देख ली थी इसलिए मन ये कह रहा था इतने कष्ट में शिफ्टिंग ठीक नही है….दूसरे दिन से नाक नली के सहारे दाल का पानी, प्रोटीन पाउडर नारियल का पानी दिया जाने लगा सब कुछ नार्मल था ….बी पी,पल्स ऑक्सीजन लेवल सब कुछ सामान्य था शुगर भी सामान्य से थोड़ा ज्यादा इसलिए हो गई थी क्योंकि स्टेरॉयड दी गई थी खैर धीरे धीरे वो भी दवा के असर से ख़त्म हो जाती …तीन दिन में बीच बीच मे एफ़ आई ओ टू को कम किया गया 100 कि जगह 90 किया गया ऑक्सीजन लेवल उतना ही बरकरार रहा, बीच बीच मे डॉक्टर से पूछने पर बताया गया कि जब तक वेन्टीलेटर पर है कुछ कह नही सकते लेकिन अभी तक सब कुछ नार्मल है तो आगे भी नार्मल ही रहेगा….ये उम्मीद डॉक्टर की तरफ से मिलती रही खैर डाक्टर भी खुदा नही सिर्फ़ इन्सान है वो अपने इन्सानी प्रयास करते रहे ….तीसरे दिन से हालत में गड़बड़ी शुरू हुई ऑक्सीजन का लेवल गिर गया एफ़ आई ओ टू जो नब्बे किया गया था अचानक 100 कर दिया गया यानी फुल पर इससे ज्यादा आक्सीजन डाक्टर भी नही दे सकते….खैर दोपहर से शाम हुई शाम की स्थित में सुधार हुआ ऑक्सीजन मेनटेन हुई …..चौथे दिन शाम व रात सामान्य रहा पांचवे दिन फिर वही शिकायत डाक्टर ने कहा हार्ट साथ नही दे रहा है बी पी अप डाउन हो रहा है जिससे आक्सीजन लेवल को मेनटेन करने में दिक्कत हो रही है ….डॉक्टर रोज कह रहे थे हालत खराब हो रही है दवाएं अच्छी व डबल डोज में दी जा रही है लेकिन शरीर मे इंफेक्शन कम नही हो रहा है…..जितने प्रयास किये जा सकते थे किये जा रहे है ….खैर इन सबके बीच शाम को फिर रिकवरी हो गई …डॉक्टर भी कह रहे थे ये अच्छे साइन है मैं भी ईश्वरीय चमत्कार पर विश्वास कर रहा था……छठे दिन टी वी यू वार्ड में फिर वही घटना घटी एफ़ आई ओ 2 फुल में होने के बावजूद ऑक्सीजन का स्तर 65 से 70 के बीच रहा मैं फिर से ईश्वर के चमत्कार का इंतिजार कर रहा था लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था 7 वा दिन भी 63 से 83 के बीच रहा डॉक्टर पूरी तरह से जवाब दे चुके थे बार बार बुरी खबर की तरफ इशारा कर रहे थे लेकिन मुझे ईश्वर में विश्वास था और ये उम्मीद लगाए था कि अब चमत्कार होने वाला है कुछ ही देर में सब कुछ पहले की तरह नार्मल हो जाएगा …..इसी बीच मैसेज के माध्यम से एक मनहूश ख़बर आई की विनोद भाई की माता जी नही रही वो ट्रामा के बगल में ही शताब्दी हॉस्पिटल में एडमिट थी …..मैं अपने में भी ज्यादा परेशान था बार बार डाक्टर बुला रहे थे दवा मंगा रहे थे इसलिए न मैं उनको फ़ोन कर सका न उनके पास जा सका क्योंकि एक माँ को बचाने का सवाल भी था ……खैर कुछ ही घंटे बाद मेरी माँ भी हमको अकेला छोड़कर उस दुनिया मे चली गई जहाँ हम सबको भी आज नही तो कल या कुछ दिन में जाना है ……हम तीनो ही मीडिया के साथी एक ही झटके में बस कुछ ही दिन में बिना माँ के हो गए माँ मुझे माँफ करना जो आपको बचा न सका आपने कभी भी आज तक किसी भौतिक वस्तु की डिमांड नही की और की न ही कोई शिक़ायत….हर माँ अपने स्वभाव के अनुरूप अपने पुत्र से कष्ट छुपाती है मेरी माँ भी ऐसी ही थी हमेशा अपने कष्ट को छिपाती रही कभी बताया ही नही की मुझे ये दिक्कत है और मैं भी ऐसा अभागा पुत्र जो उनके कष्ट को समझ न सका आप हमेशा दूसरो की मदद के लिए कहती रही है वो आपके आशीर्वाद से अपने सामर्थ्य के अनुसार हम करते रहेंगे…….. जिनके माता पिता आज भी साथ है वो परम् सौभाग्यशाली है आप सब उनका ख्याल रखना।



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