November 7, 2026

सरकार कुछ कीजिए आधार नही जिन्दगी को महत्व दीजिए

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कृष्ण मोहन उर्फ बग्गा

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सरकार कुछ कीजिए आधार नही जिन्दगी को महत्व दीजिए

कयोंकि *”नगर- निगम”* कहता है

*”जिन्दगी”* नहीं *”आधार”* जरूरी है

वाराणसी में “रैन बसेरों” की खुली पोल

रात में अधिकतर “रैन बसेरें” मिले खाली

अलाव जलाने की भी नही है व्यवस्था ,और बाथरूम भी मिला गंदा

किसी रैन बसेरें में अन्दर से ताला लटका मिला तो किसी में बाहर से

रैन बसेरें में खुद केयर टेकर मस्ती से सोते दिखाई दिये।

तो वही गरीब और असहाय लोग सड़कों पर सोने पर मजबुर है।

कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे सोने वाले लोगों ने कहा नही पता “रैन बसेरा” कहाँ है

तो किसी ने कहा “आधार कार्ड” नही है,तो रैन बसेरें में नहीं मिलता “प्रवेश”

सड़क किनारे सोने वाले लोगों के साथ जानवर भी सोते नजर आए।

अगर रैन बसेरें में कुछ लोग सोते मिलें भी तो एक पतले से गद्दे पर और उनके शरीर पर सिर्फ एक पतला कंबल देखने को मिला और उसी कंबल में वो अपनी पुरी रात गुज़ारने पर मजबूर है।

लेकीन ऐसे लोगों की सुध लेने वाला कोई नही है।और ना ही किसी को इनकी फिक्र है।

जबकी “नगर निगम” ने शहर के अन्दर “12 रैन बसेरों” का प्रतिपादन किया है।

केयर टेकर से जब पुछा गया की जिन्दगी जरुरी या “आधार कार्ड”

तो रैन बसेरे के केयर टेकर ने कहा ऊपर से आदेश है,बिना आधार प्रवेश देना वर्जित हैं।

इससे साफ जाहिर होता है,कि नगर निगम के लिए लोगो की जिन्दगी से ज्यादा “आधार” जरुरी है।