*भाग-02*
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*कोविड प्रबंधन के संबंध में बरेली मंडल की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश*
– संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए गांव-गांव टेस्टिंग का महा अभियान चल रहा है। लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। निगरानी समितियां घर-घर जाएं, स्क्रीनिंग करें, होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। लक्षणयुक्त लोगों के बारे में आरआरटी को सूचना देकर उनका एंटीजन टेस्ट कराया जाए। डीएम और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि टेस्ट की यह प्रक्रिया गांव में ही हो। सीएचसी/पीएचसी पर जाने की कोई अवश्यकता नहीं है। आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। कांटेक्ट ट्रेसिंग और बेहतर करने की जरूरत है। सभी जिलाधिकारी इसकी दैनिक समीक्षा करें। बरेली मंडल के सभी जिलों में आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी किये जाने की कार्यवाही हो।
– महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली में लॉकडाउन के कारण प्रवासी कामगारों की वापसी हो रही है। इन लोगों की प्रॉपर स्क्रीनिंग-टेस्टिंग की जाए। नियमानुसार क्वारन्टीन कराएं। इसमें लापरवाही हुई तो संक्रमण तेजी से बढ़ेगा। कंटेनमेंट ज़ोन में डोर-स्टेप डिलीवरी के माध्यम से ही दैनिक आवश्यकता के वस्तुओं की आपूर्ति कराई जाए।
– मरीजों को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध हों। सभी जिलों में एम्बुलेंस उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त प्रबंध भी किया जाए। निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया वसूलने की घटनाएं संज्ञान में आई हैं। लखनऊ और कानपुर की तर्ज पर निजी एम्बुलेंस के लिए किराया दर तय करते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
– 108 एम्बुलेंस सेवा की 85 फीसदी एम्बुलेंस कोविड डेडिकेटेड की जाए। शेष 25 फीसदी को नॉन कोविड मरीजों के उपयोगार्थ आरक्षित रखा जाए। मरीज अथवा परिजन को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध कराया जाए।
– उत्तर प्रदेश ने कोरोना कर्फ्यू की नीति अपनाई है। हमें सभी के जीवन और जीविका दोनों की चिंता है। यह सुनिश्चित कराया जाए कि सभी गरीब, जरूरतममंद रिक्शा चालक, पल्लेदार, ठेले वालों आदि को दोनों समय का भोजन उपलब्ध कराया जाए। सेवाभाव के साथ सामुदायिक भोजनालयों का संचालन किया जाए।
– कोविड मरीजों के संबंध में दैनिक रिपोर्ट एकीकृत पोर्टल पर हर दिन जरूर अपलोड की जाए। हर कोविड हॉस्पिटल प्रत्येक दिन में दो बार अपने यहां खाली बेड्स की संख्या के बारे में अस्पताल के बाहर सार्वजनिक रूप से जानकारी चस्पा करे। इसे आइसीसीसी के पोर्टल पर भी अपलोड कराया जाए। डिस्चार्ज पॉलिस को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मरीज के परिजन को दिन में कम से कम एक बार उसके मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी जरूर दी जाए।
– स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग कार्य युद्ध स्तर पर किया जाए। मास्क के अनिवार्य उपयोग के सम्बन्ध में प्रवर्तन की कार्यवाही प्रभावी ढंग से जारी रखी जाए। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी समिति पूरी सक्रियता से कार्य करें। औद्योगिक इकाइयों में कोविड प्रोटोकाॅल का पालन कराते हुए गतिविधियां संचालित की जाएं।
– मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और सीएमओ सहित सभी अधिकारी अपने जनप्रतिनिधियों से सतत मार्गदर्शन प्राप्त करते रहें। आज की बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा कतिपय जरूरत, सुधार आदि के संबंध में अवगत कराया गया है, अधिकारी गण शीर्ष प्राथमिकता देते हुए इनका निराकरण कराया जाना सुनिश्चित करें।
– रेमेडेसीवीर सहित जीवनरक्षक मानी जा रही सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। सरकारी कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन पूर्णतः निःशुल्क है। निजी अस्पतालों को जरूरत के अनुसार डीएम/सीएमओ द्वारा इसकी उपलब्धता कराई जा रही है। सभी जिलाधिकारी और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि जब भी किसी मरीज को यह इंजेक्शन दिया जाए तो वहां नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ एक चिकित्सक भी उपस्थित हो। इस जीवनरक्षक दवा की मांग, आपूर्ति और खपत का पूरा विवरण रखा जाए।
– यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकाकरण केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन हो। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन से अव्यवस्था हो सकती है। अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को ही लागू रखना उचित होगा। जिनकी बारी है उनसे यथासंभव एक-दो दिन पूर्व फोन से संपर्क कर लिया जाना उचित होगा।
– आक्सीजन की मांग 30 से 50 गुना बढ़ी है। आज ज्यादातर मरीजों की आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। उपलब्धता बढ़ाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य हो रहा है। बरेली और मुरादाबाद के लिए लगातार आक्सीजन एक्सप्रेस चलाई गई है।ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
– ऑक्सीजन वेस्टेज को न्यूनतम करने के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। ऑक्सीजन का अनावश्यक भंडारण न हो। कतिपय निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के उत्पीड़न और प्रयोगशालाओं द्वारा अनियमितता करने की शिकायतें मिलीं हैं, ऐसी गतिविधियां तत्काल बंद हों, यह कतई स्वीकार्य नहीं है।
– बरेली में मलेरिया के केस बहुत आते हैं। इसके दृष्टिगत भी काम किया जाना चाहिए।
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