May 3, 2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड प्रबंधन के संबंध में मंडलायुक्त/एडीजी/जिलाधिकारी/डीआईजी/पुलिस कप्तान गणों व अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा-बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए- अजय मिश्रा

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*भाग-01*

 

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड प्रबंधन के संबंध में मंडलायुक्त/एडीजी/जिलाधिकारी/डीआईजी/पुलिस कप्तान गणों व अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा-बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए:-*

 

– कोविड-19 के खिलाफ इस वैश्विक लड़ाई को उत्तर प्रदेश पूरी मजबूती से लड़ रहा है। बहुत से लोगों को आशंका थी कि मई के पहले सप्ताह तक एक लाख केस प्रतिदिन होंगे, लेकिन हमने सामूहिक प्रयासों से इन आशंकाओं को निर्मूल सिद्ध किया है। प्रदेश में लगातार केस घट रहे हैं, जबकि टेस्टिंग लगातार बढ़ाई जा रही है। स्वस्थ होने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है और एक्टिव केस कम होते जा रहे हैं। बीते 11-12 दिनों में 40-45 हजार एक्टिव केस कम हुए हैं। हमें ‘टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट’ के मंत्र के अनुरूप और तेजी के साथ लगातार प्रयास करना होगा।

 

– कोविड प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों में लगे अधिकारियों/कर्मचारियों को यह समझना होगा कि यह समय संवेदनशीलता का है। मरीज हो या उनके परिजन, हमें उनकी भावनाओं, समस्याओं और जरूरतों को समझना चाहिए। उनसे संवाद करते समय संवेदनशील रहें। आपदाकाल में लापरवाही अक्षम्य है।

 

– टेस्ट हो या ट्रीटमेंट, राज्य सरकार ने सभी के लिए शुल्क की दरें तय की हैं। इससे अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता। कुछ जिलों से इस संबंध में शिकायतें संज्ञान में आई हैं। अगर कहीं नियत शुल्क से अधिक की वसूली की घटना हो तो तत्काल दोषियों के खिलाफ महामारी एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाए। सभी जिलों में इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

 

– कुछ अस्पतालों द्वारा बेड खाली होने के बाद भी मरीजों को एडमिट करने से इनकार की घटनाएं संज्ञान में आई है। कुछ जिलों में इन के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। अस्पतालों के यह रवैया कतई ठीक नहीं है। निजी अस्पतालों में यदि कोई मरीज अपने इलाज का खर्च देने में असमर्थ है तो उसका भुगतान राज्य सरकार करेगी। कोविड अस्पतालों को दिन में दो बार खाली बेड्स की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य है। इसे सभी जिलों में सख्ती से लागू किया जाए।

 

– सभी डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं। सभी जिलों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं। यह संज्ञान में आया है कि कतिपय जिलों में यह जीवनरक्षक उपकरण क्रियाशील नहीं हैं। यह अनुचित है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। सभी जिलों के लिए एनेस्थेटिक और तकनीकी सहायकों की व्यवस्था कराई गई है। कोई जरूरत हो शासन को बताएं, तुरंत मदद मिलेगी। लेकिन इन्हें तत्काल क्रियाशील किया जाए।

 

– सभी जिलों में इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर स्थापित कराए गए हैं। यह कोविड प्रबंधन व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। कुछ जिलों में यह अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन अभी बहुत से जिलों में इसे और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। यहां फोन लाइन की संख्या बढ़ाई जाए। मरीजों और उनके परिजनों से लगातार संवाद करते रहें।

 

– होम आइसोलेशन में इलाजरत लोगों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाए। आइसीसीसी और सीएम हेल्पलाइन से इन लोगों से हर दिन संवाद बनाया जाए। तय प्रोटोकॉल के अनुरूप इन सभी मरीजों को दवाओं का मेडिकल किट उपलब्ध कराया जाए। मेडिकल किट उपलब्ध कराने में विलम्ब अक्षम्य हैा कई जिलों में इस दिशा में बहुत सुधार की आवश्यकता है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के 100 फीसदी होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध करा दिया जाए। होम आइसोलेशन वाले मरीजों के लिए टेलीकन्सल्टेशन व्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है।

 

– होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों को हर दिन स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाए। इसके लिए पृथक फोन नम्बर जारी किए जाने चाहिए। नॉन कोविड मरीजों को भी टेलीकन्सल्टेशन की सुविधा मिले। चिकित्सकों से संपर्क नम्बर, समय और विशेषज्ञता के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए जिले स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलों में विशेष टीम गठित की जाए।

 

– कोविड संक्रमण से गांवों को सुरक्षित रखने के लिए बुधवार 05 मई से विशेष कोविड टेस्टिंग अभियान शुरू हो चुका है। कोविड संक्रमण की रोकथाम की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण अभियान है। इस अभियान के तहत निगरानी समितियां घर-घर जाकर लोगों का इंफ्रारेड थरमामीटर से जांच करेंगी, पल्स ऑक्सीमीटर से लोगों का ऑक्सीजन लेवल चेक करेंगी। इसके उपरांत कोविड लक्षण युक्त अथवा संदिग्ध लोगों की एंटीजन जांच कराई जाएगी। टेस्ट की रिपोर्ट और मरीज की स्थिति के आधार पर उसे होम आइसोलेशन, इंस्टिट्यूशनल क्वारन्टीन अथवा अस्पताल में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। होम आइसोलेशन में रखे जाने से पूर्व मरीज को मेडिकल किट दी जाए उसे जरूरी सावधानियों के बारे में विधिवत जानकारी दी जाए। मंडलायुक्त और जिलाधिकारी स्वयं सभी व्यवस्थाओं की पड़ताल करें।आरआरटी की संख्या में बढ़ोतरी की जाए।

 

 

 

*भाग-02*

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*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड प्रबंधन के संबंध में मंडलायुक्त/एडीजी/जिलाधिकारी/डीआईजी/पुलिस कप्तान गणों व अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा-बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश*

 

– पंचायत चुनाव में सेवा देने वाले सभी कार्मिकों की टेस्टिंग जरूर की जाए। सभी पुलिस लाइन मे कोविड केयर सेंटर स्थापित कराया जाए। यहां कम से कम दो-दो ऑक्सिजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराया जाए।

 

– कोविड प्रबंधन में लगे जनपदीय अधिकारी प्रत्येक दिन किसी एक स्थानीय कोविड हॉस्पिटल का निरीक्षण करें। आइसीसीसी में हर दिन बैठक हो। राज्य स्तरीय टीम-09 की तरह जिलों में भी विशेष टीम गठित कर जिम्मेदारी दी जाए और नियमित अनुश्रवण कर जवाबदेही तय की जाए।

 

– हृदय, किडनी आदि से जुड़े नॉन कोविड गंभीर रोगियों के इलाज के लिए अस्पताल डेडिकेट किए जाएं। गर्भवती महिलाओं को तुरंत सहायता प्राप्त हो। मंडलायुक्त स्तर पर इसकी कार्ययोजना बनाकर व्यवस्था लागू की जाए।

 

– कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू 10 मई की सुबह 07 बजे तक लागू किया गया है। इसे पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए। स्वास्थ्य संबंधी कार्यों, औद्योगिक इकाइयों, कोविड वैक्सीनेशन, राशन वितरण आदि निर्बाध रूप से संचालित होते रहेंगे।सैनीटाइजेशन, स्वच्छता और फॉगिंग के कार्य सतत जारी रहें।

 

– 108 एम्बुलेंस सेवा को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। सभी जिलों में इस दिशा में विशेष प्रयास किये जायें। मरीज अथवा परिजन को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस/शव वाहन उपलब्ध कराया जाए। इस कार्य में सुविधानुसार निजी संस्थाओं, एनजीओ की भी सहायता ली जा सकती है। अंत्येष्टि की क्रिया पूरे सम्मान के साथ मृतक की धार्मिक मान्यता के अनुसार ही सम्पन्न कराने में सहायता की जाए

 

– डीएम/सीएमओ अपने जिले के जनप्रतिनिधियों से सतत संपर्क में रहें। उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते रहें। यह कोविड प्रबन्धन में उपयोगी होगा। मरीज के परिजन को दिन में कम से कम एक बार उसके मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी जरूर दी जाए। सभी कोविड अस्पतालों में इस संबंध में तत्काल प्रबन्ध किया जाए।

 

– सभी जिलों को रेमेडेसीवीर सहित जीवनरक्षक मानी जा रही सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है।सरकारी कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन पूर्णतः निःशुल्क है। निजी अस्पतालों को जरूरत के अनुसार डीएम/सीएमओ द्वारा इसकी उपलब्धता कराई जा रही है। सभी जिलाधिकारी और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि इस जीवनरक्षक दवा की मांग, आपूर्ति और खपत का पूरा विवरण रखा जाए।

 

– सभी ज़िलों में डीएम/सीएम ऐसी व्यवस्था बनाये जिससे कि होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों को सुचारू रूप से ऑक्सीजन मिल सके। एक-एक रीफिलर होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए नामित करें। कोविड सम्बन्धी डेटा हर दिन समय से अपलोड की जाए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

 

– प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति हर दिन बेहतर हो रही है। आपूर्ति बढ़ाने के लिए शासन स्तर से सभी जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। आज 838 मीट्रिक टन की आपूर्ति प्रदेश में हुई है। इसके सुचारु वितरण के साथ-साथ ऑक्सीजन वेस्टेज रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रयास किए जाएं।

 

– जिलों में आयुष चिकित्सकों का भी सहयोग लें। उन्हें कोविड सम्बन्धी कार्यों में लगाया जाए। कण्टेनमेंट ज़ोन सख्ती से प्रभावी करायें। समाज के अलग-अलग वर्गों से नियमित अंतराल पर संवाद करते रहें।

 

– वैक्सीन वेस्टेज शून्य करने के लिए नियोजित प्रयास किये जायें। उन्हें ही टीकाकरण केंद्र पर आमंत्रित करें जिनका वैक्सीनेशन होना है। अनावश्यक भीड़ न हो। सभी नागरिकों का टीकाकरण सुचारू रूप से कराया जाए।