*प्रबंध समिति फिर कराने जा रहीं हैं सचिव समेत अन्य पर मुकदमा*
*467 सदस्यों का फर्जी हस्ताक्षर बनाने व निष्कासन के बाद भी क्लब में जबरन प्रवेश का लगा है आरोप*
*दो मामलों में दर्ज होगा मुकदमा : रमेश गिनोडिया*
*मामला वाराणसी के प्रतिष्ठित पीएनयू क्लब का*
*रिपोर्ट – भुवनेश्वरी मलिक*
*वाराणसी।* नगर की प्रतिष्ठित प्रभु नारायण यूनियन क्लब (पीएनयू क्लब) के मौजूदा पदाधिकारियों ने कुछ पूर्व पदाधिकारियों व संस्था को बदनाम करने और तोड़ने की साजिश का आरोप लगाया है। जिसके बाद वर्तमान अध्यक्ष अशोक वर्मा के साथ प्रबंध समिति ने माननीय न्यायालय का शरण लिया। प्रबंध समिति के प्रार्थना पत्र पर उच्चाधिकारियों के आदेश से कुछ माह पूर्व क्लब के आफिस का ताला तोड़कर की गई चोरी के संबंध में क्षेत्राधिकारी कैंट व अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ द्वारा जांच की जा रहीं थी।
उक्त घटना मे दोषी पाये गये क्लब के सचिव डॉ रितेश जायसवाल, मैनेजर संजय खरे, सुशील सोनी, दीपक मिश्रा, मनोज जायसवाल व अन्य लोगो के खिलाफ थाना कैंट में धारा 457, 380 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। क्लब के पूर्व अध्यक्ष रमेश गिनोडिया ने बताया कि सचिव डॉ रितेश जायसवाल द्वारा लगातार प्रबंध समिति पर गम्भीर व अनर्गल आरोप लगाकर क्लब के संविधान की धज्जियाँ उड़ाईं जा रही हैं जो बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 28 दिसंबर 2018 को अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ द्वारा धारा 133 के तहत आदेश दिया गया था, कि क्लब को स्थायी रूप से बंद कर 3 जनवरी 2019 को सूचित करें। जिसके बाद 2 जनवरी 2019 को अध्यक्ष अशोक वर्मा के साथ प्रबंध समिति विधिक सलाह हेतु हाईकोर्ट गये। जहां 3 जनवरी को एसीएम चतुर्थ को एक पत्रक के माध्यम से अपने पक्ष को रखा गया। पत्रक में हम लोग ने धारा 133 का जवाब देतें हुए कहा है कि क्लब सार्वजनिक स्थल नहीं है जहां आसपास के लोगों को कठिनाइयां होती है। इस तरह की धारा क्लब के अंदर नहीं आती। जो भी मामला है वो प्रबंध समिति के मध्य है न कि बाहर का, और इस तरह का आदेश देने से पहले क्लब के प्रबंध समिति का पक्ष सुने बगैर बंद नहीं कराया जा सकता। आगे बताते हुये श्री गिनोडिया ने कहा कि सचिव डॉ रितेश जायसवाल द्वारा पिछले वर्ष 3 अक्टूबर व 10 नवंबर को मिटिंग दिखाकर 467 लोगों का दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर लिया गया है। जिसमे उन्होंने यह दिखाया है कि क्लब का परिसर भरा हुआ है। जो सरासर फर्ज़ी है। यें फर्जी सभा दिखाई गई है। इस मामलें में भी प्रबंध समिति के लोग जिलाधिकारी से मिले। जिलाधिकारी ने बातों को सुना और एसीएम चतुर्थ को जांच कर एफआईआर करने का आदेश दिया। वहीं दूसरे मामले में संविधान की धारा 27 (घ) से सचिव डॉ रितेश जायसवाल को क्लब से निष्कासित कर दिया गया। बावजूद ये क्लब में जबरन प्रवेश कर रहे हैं और भयावह माहौल बना रहे हैं। इस पर भी एफआईआर दर्ज करने के लिए जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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