April 16, 2026

कोरोना संक्रमित होने पर फेफड़े की कोशिकाओं के मेटोबोलिक रिएक्शन रेट में होता है बदलाव- अजय मिश्रा

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कोरोना संक्रमित होने पर फेफड़े की कोशिकाओं के मेटोबोलिक रिएक्शन रेट में होता है बदलाव

 

★ आइआइटी खड़गपुर की ओर से विकसित किए गए मॉडल से सामने आया तथ्य

 

【 कोरोना संक्रमित होने पर फेफड़े की कोशिकाओं के मेटोबोलिक रिएक्शन रेट में होता है बदलाव आइआइटी खड़गपुर की ओर से विकसित किए गए मॉडल से सामने आया तथ्य। अनुसंधानकर्ताओं का अनुमान है कि कोरोना से लिपिड मेटोबोलिजम विशेषकर फैटी एसिड ऑक्सीडेशन कॉलेस्ट्राल बायोसिंथेसिस सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 】

 

 

कोलकाता :

 

कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद खतरनाक होती जा रही है। इसमें संक्रमण के मामले तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही मौतों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर उठ रहा है। इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी) खड़गपुर ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिससे पता चला है कि कोरोना संक्रमित होने के बाद फेफड़े की कोशिकाओं के ‘मेटोबोलिक रिएक्शन रेट’ में बदलाव होता है। इस अनुसंधान की बदौलत कोरोना महामारी को और भी अच्छी तरह से समझा जा सकेगा और इससे निपटने के लिए इलाज के बेहतर तरीके विकसित किए जा सकेंगे।

 

आइआइटी खड़गपुर के स्कूल ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित घोष ने कहा-‘हमने इस जीनोम-स्केल मेटोबोलिक मॉडल को विकसित करने में कोरोना से संक्रमित मनुष्य की सामान्य ब्रोंकियल सेल के जीन एक्सप्रेशन का इस्तेमाल किया। इसके साथ वायरस के माइक्रो मोलेकुलर मेक अप का भी प्रयोग किया गया है।’

अन्य अनुसंधानकर्ता पीयूष नंदा ने कहा-‘इस मॉडल के जरिए हमने बताने की कोशिश की है कि मेटोबोलिज्म किस तरह से काम करता है और बीमार पड़ने पर इसमें किस तरह से बदलाव आते हैं।

 

अनुसंधान में यह भी पता चला है कि जब कोरोना जैसे वायरस शारीरिक कोशिकाओं पर हमला करते हैं तो किस तरह से सैकड़ों केमिकल रिएक्शन संबंधी बदलाव आते हैं। इससे इस बीमारी के बारे में हमारी समझ और बेहतर होगी। मेटोबोलिक रिप्रोग्रामिंग के बारे में हमारी समझ जितनी अच्छी होगी, हम कोरोना से निपटने को इलाज के उतने ही बेहतर तरीके तलाश पाएंगे।’

 

अनुसंधानकर्ताओं का अनुमान है कि कोरोना से लिपिड मेटोबोलिजम, विशेषकर फैटी एसिड ऑक्सीडेशन, कॉलेस्ट्राल बायोसिंथेसिस सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।