वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र के 16वें दौरे पर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस दौरान वह संसदीय क्षेत्र को अरबों की सौगात देंगे। लेकिन केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार से खफा लोगों ने भी पीएम के इस दौरे का प्रबल विरोध करने की ठान ली है। इसमें जहां किसान एक तरफ लामबंद हैं जो कड़कड़ाती ठंड में भी रात में खेतों में जमा हैं और तय कर रहे हैं पीएम के विरोध की रणनीति तो उधर नाविक भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी के सिलसिले में बैठक में मशगूल हैं। वहीं वित्तविहीन शिक्षकों ने भी ताल ठोंक रखी है। शिक्षकों का समूह तो कानपुर, मुरादबाद, बरेली, लखनऊ तक से आ रहा है। कुल मिला कर शनिवार का दिन स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
बता दें कि पीएम मोदी का यह 16 काशी दौरा है और जिस तरह से लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है वैसा इससे पहले के दौरों पर नहीं देखा गया। यह दीगर है कि पिछले साल सितंबर में जब पीएम बनारस आए थे तब बीएचयू की छात्राएं आंदोलित थीं जिसके चलते प्रशासन ने डीरेका से दुर्गाकुंड जाने के पीएम के पूर्व निर्धारित रूट में अंतिम क्षणों में परिवर्तन किया था। तब ये आरोप लगा था कि दिल्ली, लखनऊ और अलीगढ़ के छात्रों को बुला कर पीएम के दौरे पर अशांति फैलाने की कोशिश की गई थी। लेकिन इस बार तो सारे के सारे विरोधी बनारस से ही जुड़े हैं। खास तौर पर किसान और नाविक। वैसे शिक्षक भी बनारस और चंदौली के ही ज्यादा होंगे।
बता दें कि बनारस के किसान तो पिछले एक साल से आंदोलित हैं। इसमें 1998 की ट्रांसपोर्ट नगर योजना से जुड़े चार गांव, बेरवन, कन्नादांड़ी, मोहनसराय और बैरवन के 1194 किसान हैं जो भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का हवाला देते हुए योजना को निरस्त कर अपनी जमीन वापस करने की मांग कर रहे हैं। कानून का हवाला देते हुए उनका कहना है कि नियमानुसार पांच साल तक परियोजना के मूर्त रूप न लेने की सूरत में योजना स्वतः ही समाप्त हो जाती है फिर यह तो 1998 का मामला है और योजना के तहत अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई है। दूसरे रिंग रोड फेज-2 योजना से प्रभावित 16 गांव के पांच हजार से ज्यादा किसान हैं और ये भी भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। यहां यह भी बता दें कि ये किसान अपनी समस्या से जुड़ी बातों को खून से लिख कर पीएम को भेज चुके हैं। दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। अब ये शनिवार को चांदपुर में आयोजित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान बडी तादाद में पहुंच कर अपना हक मांगने की तैयारी में हैं। आलम यह कि इस शीतलहरी में भी ये किसान शुक्रवार की देर रात तक खुले में खेतों में जमा हैं और शनिवार के आंदोलन की रणनीति बनाने में मशगूल हैं। किसान नेता विनय शंकर राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसान किसी के आगे झुकने वाले नहीं हैं, इस बार संसदीय क्षेत्र में ही वो पीएम को अपनी ताकत का एहसास कराने को कटिबद्ध हैं। अगर जिला प्रशासन हमारे राह में रोड़ा बनेगा तो उसे भी जवाब देंगे। यह भी कहा कि ज्यादा से ज्यादा और क्या होगा, गिरफ्तारी, हम किसान उसके लिए भी तैयार हैं। चांदपुर में बडी तादाद में किसान पहुंचेंगे।
उधर वित्त विहीन शिक्षक नेता व एमएलसी उमेश द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वैसे तो वित्त विहीन शिक्षक समान कार्य समान वेतन, सम्मानजनक सेवा शर्त की मांग को लेकर साल भर से आंदोलित हैं। कारण साफ है कि पिछली अखिलेश यादव सरकार ने वर्षों बाद हमारी सम्मानजनक मानदेय की मांग को स्वीकार करते हुए नाम मात्र को ही सही मानदेय देना शुरू किया था जिसे योगी सरकार ने आते ही बंद कर दिया। उससे आंदोलित शिक्षक जगह-जगह आंदोलन कर रहे थे, इसी बीच पांच सितंबर, शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों पर जो अपमानजनक टिप्पणी की उससे उन्हें गहरी चोट पहुंची। तभी से हम सभी वित्त विहीन शिक्षक सीएम से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग कर रहे हैं। इसके तहत जगह-जगह आंदोलन किया जा रहा है। बताया कि शुक्रवार को ही गाजीपुर में विकास भवन के सामने हमने बडी सभा की। हालांकि प्रशासन ने पूर्व निर्धारित स्थल से हमारा कनात वगैरह हटवा दिया था जिसे लेकर नोकझोंक भी हुई। अब शनिवार को बनारस और चंदौली के शिक्षक दिन के 11 बजे सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज पहुंचेंगे। वहां से रवींद्रपुरी कालोनी स्थित पीएम के संसदीय कार्यालय तक जाएंगे। वहां धरना प्रदर्शन होगा। इसमें मेरे अलावा बरेली-मुरादाबाद के शिक्षक विधायक संजय मिश्र, महिला विंग।
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