September 21, 2026

चिल्ला बॉर्डर से हटे किसान, यातायात के लिए खुल गया रास्ता

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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों (Farmers) के रुख में अचानक शनिवार देर शाम कुछ बदलाव नजर आया. किसानों ने दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर चिल्ला बॉर्डर का रास्ता खोल दिया. किसान कुछ दिनों से यहां पर प्रदर्शन कर रहे थे और रास्ते को जाम कर रखा था. जिसके चलते आवागमन ठप था. किसानों का कहना है कि कृषि मंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) से मुलाकात के बाद उन्होंने ये कदम उठाया है. जानकारी के अनुसार किसानों की ओर से चिल्ला बॉर्डर खोले जाने के बाद वहां पर यातायात सुचारू हो गया है.

मांगे मानने का दिया आश्वासन

किसानों के अनुसार उनके नेताओं ने रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री से मुलाकात की जिसके बाद दोनों ने ही किसानों की मांगों को मानने का आश्वासन दिया. इस बैठक के बाद किसानों ने चिल्ला बॉर्डर को खोलने का निर्णय लिया और शनिवार देर शाम को बॉर्डर खोल दिया गया.

 

पहले किया था भूख हड़ताल का ऐलान

इससे पहले किसानों ने 14 दिसंबर को भूख हड़ताल का बड़ा ऐलान किया था. संयुक्त किसान आंदोलन के नेता कमल प्रीत सिंह पन्नू ने बताया सभी संगठनों के प्रतिनिधि और अध्यक्ष एक मंच पर 14 तारीख को अनशन पर बैठेंगे. हम अपनी माताओं और बहनों से भी इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान करते हैं.

आंदोलन के 17 दिन
केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को अब 17 दिन हो गये हैं और शनिवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आंदोलन अब किसानों का प्रदर्शन नहीं रह गया है क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्वों की घुसपैठ हो गयी है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाये गये कृषि सुधारों को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है. हालांकि गोयल ने यह नहीं बताया कि क्या सरकार की प्रदर्शन स्थलों पर देखे गये प्रतिबंधित संगठन के किसी व्यक्ति के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की योजना है या नहीं. रेल, वाणिज्य और उद्योग तथा खाद्य और आपूर्ति मामलों के केंद्रीय मंत्री, गोयल ने फिक्की की वार्षिक बैठक में कहा, ‘अब हमें लगता है कि तथाकथित किसान आंदोलन बमुश्किल ही किसानों का आंदोलन रह गया है. इसमें वामपंथी और माओवादी तत्वों की घुसपैठ हो गयी है. जिसका नजारा हमने पिछले दो दिन में देखा जब राष्ट्रविरोधी कृत्यों के लिए जेलों में डाले गये लोगों की रिहाई की मांग उठी.’