September 14, 2026

यूपी में कड़क कानून व्यवस्था

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उत्तर प्रदेश नागरिकता संशोधन कानून की आड़ में बीते दिनों पूरे उत्तर प्रदेश को उपद्रव की आग में झोंकने वालों और दंगा-आगजनी की साजिश को पर्दे के पीछे से अंजाम देने वाली देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सूबे के कप्तान योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश में दंगाइयों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूली के लिए नियमावली को मंजूरी दे दी है। कोरोना काल में यहां एक तरफ सीएम योगी स्वास्थकर्मी और अन्य कोरोना योद्धाओं के साथ सलीके से पेश आने की हिदायत देते नजर आ रहे हैं, वहीं शांति भंग करने वालों के खिलाफ एक्शन मोड में भी नजर आ रहे हैं।

राज्य सरकार ने क्षति वसूली अध्यादेश के तहत ऐसी व्यवस्था कर दी है कि सरकारी-निजी संपत्ति को नुकसान वाले की मुकदमे के दौरान अगर मौत भी हो जाती है तो वसूली उसके घर वालों से की जाएगी। नियमावली के मुताबिक कार्यवाही के दौरान किसी भी पक्षकार की अगर मौत हो जाती है तो वसूली का मुकदमा खत्म नहीं होगा। नियमावली में सरकारी व निजी संस्थानों के लिए कहा गया है कि उनके यहां होने वाली तोड़फोड़ या संपत्तियों के नुकसान की सीसीटीवी फुटेज या विडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उनकी होगी। सम्पत्ति के संबंध में हुई क्षतियों का अनुसंधान करने के लिए दावा अधिकरण का गठन करने और प्रतिकर तय करने के लिए नियम बनाए गए हैं।

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गौरतलब है कि प्रदेश में उपद्रवियों की पहचान के बाद उनके पोस्टर लगाए गए थे। ये मामला काफी विवादों में रहा था और कोर्ट में भी चला गया था। जिसको लेकर बाद में सरकार ने कानून भी बना दिया था। योगी सरकार की नई नियमावली के तहत अब निजी संपत्तियों को क्षति पहुंचाने वालों के वसूली से जुड़े पोस्टर व फोटो लगाने का खर्च भी आरोपितों से ही वसूल किया जाएगा। फोटो व पोस्टर लगाने की कार्यवाही तब की जाएगी जब आरोपित वसूली की रकम देने से बच रहा हो और ट्रिब्यूनल का फैसला न मान रहा हो।