- आज एक बार फिर पूरे देश के सामने 12 दिसंबर, 2012 की उस रात की यादें ताजा हो गई हैं। निर्भया के साथ दर्दनाक हादसे को अंजाम देने वाले चार दरिंदों को आज सुबह फांसी पर लटका दिया गया। गुरुवार शाम तक दोषियों को उम्मीद थी कि उनकी फांसी टल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

- निर्भया के दोषियों की याचिका पर काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच हुई बहस को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान दोषी अक्षय की पत्नी कोर्ट के बाहर मौजूद थी। उसे जब इस बारे में पता लगा तो वह बुरी तरह रोने लगी और अपने पति की फांसी टालने की मांग करने लगी।
- गुरुवार देर रात जब दोषियों को पता चला कि उनकी फांसी अब किसी हालत में नहीं टल सकती है, तो अचानक की उनके व्यवहार में बदलाव आ गया। तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषी खबर मिलते ही बेचैन और आक्रामक हो उठे। वो लोग अपने सेल के अंदर चीखने चिल्लाने लगे। गुरुवार रात भर दोषियों को नींद नहीं आई। वो बेचैन होकर अपने बैरक में ही टहलते रहे। फांसी का खौफ उनके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।
- शुक्रवार तड़के 3:15 बजे ही चारों दोषियों को उनके सेल से उठाया गया। दैनिक क्रिया के बाद चारों को नहाने के लिए कहा गया। उन चारों के लिए जेल प्रशासन की ओर से चाय मंगाई गई, लेकिन किसी ने भी चाय नहीं पी। इस दौरान विनय ने कपड़े बदलने से इनकार कर दिया और रो-रो कर माफी मांगने लगा।

- इसके बाद उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया गया। उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई। फांसी घर में लाने से पहले चारों को काले कुर्ते-पजामे पहनाए गए। फिर उनके हाथ पीछे की ओर बांध दिए गए। इसके बाद जब उन्हें फांसी घर लाया जाने लगा तो एक दोषी सेल में ही लेट गया और जाने से मना करने लगा।
- : किसी तरह उसे पकड़ कर फांसी घर तक लाया गया। फांसी कोठी से कुछ दूर पहले ही उनके चेहरे को काले कपड़े से ढंका गया। इसके बाद उनके पैरों को भी बांधा गया ताकि वे ज्यादा छटपटा न पाएं और एक दूसरे से टकराएं नहीं।

- इसके बाद ठीक साढ़े पांच बजे पवन जल्लाद ने जेल नंबर-3 के सुपरिटेंडेंट के इशारे पर लीवर खींच दिया। इस दौरान जल्लाद की मदद के लिए तीन जेल कर्मचारी भी मौजूद थे। फांसी के करीब आधे घंटे बाद डॉक्टरोंने चारों दोषियों को मृत घोषित कर दिया।

- अधिकारी ने कहा कि हमने उसे राष्ट्रीय राजधानी से बहुत दूर भेज दिया जिससे कि लोग उसका पता न लगा सकें और वह एक नई जिंदगी शुरू कर सके। नाम जाहिर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि वह दक्षिण भारत में कही कुक का काम कर रहा है। उसका नियोक्ता उसके वास्तविक नाम के बारे में नहीं जानता और वह उसकी पिछली जिंदगी से भी अवगत नहीं है।
- अधिकारी ने कहा कि हम उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजते रहते हैं जिससे कि वह किसी की नजर में न आ सके। मालूम हो कि घटना के समय नाबालिग सामूहिक दुष्कर्म में शामिल पांचवां व्यक्ति था। खबरों के अनुसार निर्भया के साथ सबसे अधिक क्रूरता इसी नाबालिग ने की थी। एनजीओ अधिकारी के अनुसार उस नाबालिग रहा आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह के लिए काम करता था उसके राम सिंह के यहां 8000 रुपये बकाया थे और वह लगातार राम सिंह से अपने पैसे मांग रहा था। घटना की रात वह राम सिंह के पास अपने पैसे लेने गया था और अपराध का हिस्सा हो गया था।
- 16 दिसंबर 2012 से पहले ऐसी थी उसकी जिंदगी: दिल्ली से महज 240 किलोमीटर दूर एक गांव में रहने वाला यह नाबालिग महज 11 साल की उम्र में अपना घर छोड़ भाग आया था। घर से भागकर दिल्ली आते ही सबसे पहले उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई जो निर्भया कांड का आरोपी था जिसने तिहाड़ में आत्महत्या कर ली थी।

- रामसिंह ने ही उसे बस की सफाई के काम पर रख लिया और यहीं से उसकी नौकरी शुरू हो गई। बता दें जिस बस की सफाई का कमा उसे दिया गया उसी में 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया गया जिसमें यह नाबालिग भी शामिल था 😐









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