कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी तमाम इस्लामिक संगठन तमाम वामपंथी संगठन और देश का एक बड़े वर्ग का दोगलापन देखिए :-अनुराग शुक्ला राष्ट्रीय सम्पर्क प्रमुख जय भारत मंच ने कहा
बिल्किस बनो केस में आरोपी 17 साल जेल में थे उनके परिवार वालों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाया और करीब 20 केस का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में 12 साल जेल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मुक्त किया है फिर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस दिया
गुजरात सरकार ने अपने जवाब में कहा कि यह 17 साल जेल में रह चुके हैं यदि इन्हें अदालत मुक्त करती है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है फिर सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन पर गुजरात सरकार ने एक कमेटी बनाई और उस कमेटी के सिफारिश पर बिलकिस बानो केस के आरोपियों को मुक्त कर दिया गया
तुरंत ही भारत की सभी विपक्षी पार्टी और एक बड़ा तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग इस पर छाती कूटने लगी.. दुनियाभर के अखबार इस पर लेख लिखने लगे और इस तरह से मीडिया ट्रायल हुआ कि दबाव में सुप्रीम कोर्ट को अपने ही निर्णय के खिलाफ फिर से सुनवाई करनी पड़ी और अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फिर से सुनवाई कर रहा है
अब आप दूसरा मामला देखिए
कल सुप्रीम कोर्ट में गोधरा कांड के दोषी दरिंदे फारुख और उसके 17 साथियों की तरफ से जमानत की याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएल नरसिन्हा की बेंच ने कहा कि फारुख और उसके 17 साथी 2004 से जेल में है क्योंकि यह 17 साल जेल में रह चुके हैं इसलिए इन्हें जमानत दिया जा रहा है
इस फारुख और उसके 17 साथियों पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी करने का आरोप है
इस पर गुजरात सरकार के तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा बेंच सिर्फ पत्थरबाजी को ना देखें बल्कि पत्थरबाजी के पीछे के इरादे को देखें क्योंकि इन दरिंदों का ट्रेन पर पत्थरबाजी का इरादा यह था कि जल रही ट्रेन के डिब्बे में से कोई भी यात्री बाहर ना निकल सके और बाहर से कोई भी व्यक्ति उन्हें बचा ना सके …सामान्य स्थिति में पत्थरबाजी एक मामूली गुनाह हो सकता है लेकिन इस केस में जिसमें 59 निर्दोष लोगों की जान गई है और यह पत्थरबाजी इसीलिए की गई थी कि ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मरे इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इनका गुनाह नहीं बल्कि इनके गुनाह के पीछे का इरादा देखते हुए इन्हें जमानत नहीं देना चाहिए
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएल नरसिंहा ने फारुख को जमानत देने का आदेश दिया और बाकी 17 दरिंदों की जमानत की सुनवाई छुट्टियों के बाद करने का आदेश दिया
लेकिन बिलकिस बानो के आरोपियों पर जिस तरह का शोर भारत की विपक्षी पार्टियों ने मनाया था उस तरह का शोर गोधरा में 59 हिंदुओं को मारने वाले दरिंदों की जमानत पर क्यों नहीं मचाया जा रहा




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