June 20, 2026

चुनाव का बदला लेने में उतारू है सरपंच, वोट ना देने से खाद्यान्न पर्ची से नाम कटवाया और आगे भी दी अन्य कोई लाभ पंचायत से ना मिलने की धमकी दी –

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. चुनाव का बदला लेने में उतारू है. सरपंच. मझौली जनपद पंचायत के अंतर्गत सरपंच के पति ,वोट ना देने से खाद्यान्न पर्ची से नाम कटवाया और आगे भी दी अन्य कोई लाभ पंचायत से ना मिलने की धमकी ,,,,,,

 

सीधी मध्य प्रदेश से खास खवर,,,,,

आपको बता दूं कि यह मामला सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत परसीली का है ।जहां पर एक गरीब परिवार को संक बस सरपंच द्वारा उस गरीब परिवार का खाद्यान्न पर्ची से ही नाम कटवा दिया,

आपको बता दूं कि मझौली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत पर सिली निवासी अंकित शर्मा पिता चंद्रिका प्रसाद शर्मा का मामला है जिन्होने 19 महीनों तक बीपीएल सूची के आधार पर का खाद्यान्न मिलता था, किंतु अभी हाल में हुए चुनाव में पंचायत के सरपंच सविता सिंह के पति राजेन्द्र सिंह द्वारा अपने चुनावी रंजिश का बदला लेने के लिए एक गरीब परिवार जो पूर्णता मजदूरी कर के अपने परिवार का भरण पोषण करता है शासन की योजना के तहत बीपीएल सूची में नाम होने के कारण अंकित शर्मा लगातार 19 महीने तक खाद्यान्न पाया किंतु अब वह उस लाभ से पूर्णरूपेण वंचित है, क्योंकि पंचायत के सरपंच उक्त व्यक्ति से द्वेष एवं जलन की भावना रखते हैं, यहां तक की सरपंच ने यह तक कह डाला कि जब तक मेरे हाथ मे पंचायत का राजकाज है तब तक तुम्हें पंचायत का कोई भी लाभ नहीं मिलेगा हर लाभ से वंचित रहोगे यह मेरा दावा है ऐसी स्थिति में उस गरीब परिवार का भरण पोषण कैसे होगा यह सोचने का विषय है अंकित शर्मा अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि यदि मुझ में गलती है तो मेरी जांच करवाई जाए ना तो मेरे पास पर्याप्त जमीन है कि मैं खेती करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकूं कुछ दिन पहले मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया है मैं ही घर का एक पूर्ण जिम्मेदार व्यक्ति हूं यदि मैं दोषी पाया जाता हूं तो मेरे ही खिलाफ कार्रवाई की जाए नहीं दोषी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए मुझे उचित न्याय दिलाई जाए

, अंकित शर्मा द्वारा पूर्व में जनपद पंचायत एवं जिला स्तर पर कई बार अपनी आपबीती बताते हुए न्याय की गुहार लगाई पर उन्हें न्याय अभी तक नहीं मिला यहां तक की उन्होंने जनप्रतिनिधियों तक का भी दरवाजा न्याय के लिए खटखटाया पर उस गरीब परिवार का दुर्भाग्य है कि वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है और उसे न्याय नहीं मिल रही है आखिर क्या कारण है कि फरियादी चारों तरफ न्याय की गुहार लेकर दौड़ रहा है फिर भी उसे न्याय नहीं मिलता यह एक सोचने का विषय है की एक सरपंच पति के बदौलत उस गरीब परिवार का पेट मारा जा रहा है बड़ा ही यह एक चिंता का विषय है की इस तरह की अर्थव्यवस्था में कैसे पंचायत के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिलेगा जब सरपंच अपनी मनमौजी पर उतारू है तो इससे यही सिद्ध होता है कि उस गांव के लोग शासन की योजनाओं से हमेशा वंचित दिखाई देंगे