June 13, 2026

पूर्व पदाधिकारियों सहित 350 वकीलों ने बार एसोसिएशन बाई लाज संशोधन का किया विरोध-

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Allahabad High Court: पूर्व पदाधिकारियों सहित 350 वकीलों ने बार एसोसिएशन बाई लाज संशोधन का किया विरोध_____

 

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की वर्तमान कार्यकारिणी ने एक ओर एसोसिएशन के बाईलाज में संशोधन के लिए आगे की कार्रवाई कर दी है। वहीं दूसरी ओर वर्तमान उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव और पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय, अमरेंद्र नाथ सिंह ने इस पर आपत्ति जताई है। साथ ही बार के 321सदस्यों ने वर्तमान अध्यक्ष राधाकांत ओझा को पत्र भेजकर इसका विरोध किया है|

 

क्‍या कहते हैं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष : दोनों पूर्व अध्यक्षों का कहना है कि वर्तमान नियमावली के मुताबिक बाईलाज में संशोधन तभी किया जा सकता है कि जब संशोधन के मुद्दों को पहले आम सभा में चर्चा की जाए। उसके बाद उसमें सदस्यों का पक्ष-विपक्ष जानने के लिए गुप्त मतदान या खुले मतदान या अन्य कोई प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उन्‍होंने वर्तमान संशोधन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। कहा कि यह न तो लोकतांत्रिक है और न ही नियमावली के मुताबिक अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है|

 

कहा- वर्तमान कार्यकारी सदस्‍यों से राय नहीं ली गई : वर्तमान कार्यकारिणी बाईलाज के विपरीत जाकर संशोधन करना चाहती है, जबकि होना यह चाहिए कि संशोधन के हर एक बिंदुओं पर सदस्यों की आम राय जानी जाए और उसके बाद ही इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई जानी चाहिए। वर्तमान कार्यकारिणी ने सदस्यों से कोई राय ली नहीं गई और रेफरेंडम कमेटी का गठन कर सीधे मतदान पर आ गई|

 

बार एसोसिएशन के वर्तमान उपाध्‍यक्ष ने भी विरोध जताया : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वर्तमान उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव ने भी इस आपत्ति जताई। कहा कि उपाध्यक्ष ने कहा कि पहले तो संशोधन किया जाए या नहीं, इस पर सदस्यों की राय ली जानी चाहिए। उसके बाद आगे बढ़ना चाहिए। इस संशोधन प्रक्रिया में सदस्यों को तो सीधे हां या नहीं का उत्तर देना है। संशोधन भी कोई एक मसले पर नहीं है, कई मसलों पर है। इसलिए मसले भी कई हैं। इसके लिए रायशुमारी बहुत जरूरी थी। वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल भी पांच जनवरी तक का है। पांच दिसंबर 2022 को उसे आम सभा बुलानी चाहिए थी। इस संशोधन से वर्तमान कार्यकारिणी अपना कार्यकाल तीन महीने तक बढ़ा लेगी। उन्होंने कहा कि नियमावली में संशोधन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके साथ ही संयुक्त सचिव संजय सिंह सोमवंशी, गवर्निंग काउंसिल सदस्य दिलीप यादव, जितेंद्र सिंह, पूजा सिंह ने लिखित आपत्ति उठाई थी। हालांकि उस आपत्ति को मिनट बुक में दर्ज नहीं कराया गया। उपाध्यक्ष ने कहा कि इससे एल्डर्स कमेटी की शक्ति को क्षीण होगी|

 

क्‍या कहते हैं बार एसोसिएशन के अध्‍यक्ष : दूसरी ओर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने कहा कि 15 हजार सदस्यों को बुलाकर चर्चा करना मुश्किल काम है। बाईलॉज में यह व्यवस्था है कि आम सभा के गुप्त मतदान के जरिए भी रायशुमारी की जा सकती है। अब इसकी व्यवस्था बनाई गई है। सदस्य हां और नहीं में अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। वह उनकी स्वेच्छा है। उन्हें प्रस्ताव रखने का अधिकार है|